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दिसंबर 10, 2012


मिथिला  राज्य  के  धारण  में
देखल जाओ  एक  नजर
धनकर ठाकुर , कमला कान्त झा जी , विजय ठाकूर  , भीम  सिंह ,  शैलेंदर  झा  जी , इतियादी  महानु - भाव  के  उपस्थिथि  में  ,  सम्पन्य  भेल













मिथिलांचल टुडे  अध्यन  करैत   मैथिल समुदाय 











विजय ठाकुर  जी 


कमला कान्त  झा 








डॉक्टर  - गुरमैता  जी 








एक  दोसर  सन  भेट - घांट  करैत  फेस बूकिया  संघ  , जय  मैथिल - जय  मिथिला  करैत 

मिथिला राज्य के धारना  में फेस बूकिया  युबा संघ  बसन्त  झा  बत्स ,सागर मिश्र , विकास ठाकुर  , मदन कुमार ठाकुर , क्रिशन कुमार राय  (संपादक  मिथिलांचल टुडे ) जगदानन्द झा (मन्नू ) राजकुमार यादव , नीतिस  चौधरी , सत्येंदर कुमार  झा , इतियादी --

मिथिलांचल  टुडे  टीम 

 मिथिला राज्य के  धारना  में -मिथिलांचल टुडे  टीम 

मिथिला राज्य के  धारना में  मिथिलांचल  टुडे  टीम 

मिथिला राज्य के  धारना  में  मिथिलांचल टुडे  टीम 

धनाकर  ठाकू  जी   अपन  मुखरविन्द  सन  मैथिलि  आन्दोलन  के  बारे  में  चर्चा  करैत 


नवंबर 18, 2012

घोटालाबला पाइ (हास्य कविता)


घोटालाला पा
                         (हास्य कविता)


ई पोटरी त हमरा सँ 
उठने नहि उठि रहल अछि 
कनेक अहूँ जोड़ लगा दिय भाई 
ई छी घोटालावला पाई।

हम पूछलियन ई की छी 
ओ हमरा कान में कहलनि
कोयला बेचलाहा सभटा रुपैया 
हम एही पुत्री में रखने छि .

हमरा सात पुस्त लोकक गुजर
एही रुप्पैया स चली जायत
हम धरती में पैर नहीं रोपाब आई 
इ छि घोटालावला पाई।

चुपेचाप थोड़ेक अहूँ लिय 
मुदा केकरो सँ कहबई नहि भाई 
सरकारी संपित हम केलियई राई-छाई 
इ छि घोटालावला पाई।

कोयला भूखंडक बाँट-बखरा दुआरे
मंत्रिमंडल के सर्जरी भेल 
लोक हो-हल्ला केलक मुदा 
कोयला दलाली के नफ्फा हमरे ता भेल।

फेर मंत्री पद भेटैत की नहि?
ताहि दुआरे चुपेचाप पोटरी बनेलौहं 
सभटा अपने नाम केने छि भाई 
ई छी घोटालावला पाई।

देखावटी दुआरे सरकारी खजाना  पर 
बड़का-बड़का ताला लटकने छि 
मुदा राति होएते देरी हमीह 
भेष बदली खजाना लूटि लैत छी।

मंत्रीजी के कहल के नहि मानत?
सरकारी मामला में कियक किछु बाजत?
चुपेचाप सभटा काज होयत छैक औ भाई 
 ई छी घोटालावला पाई।

अक्टूबर 16, 2012

लोक करे लूटमार जेंका (हास्य कविता)

लोक करे लूटमार जेंका
                         (
हास्य कविता)

लोभी बैसल अछि लोभ मे जोंक जेंका
ओक्कर चालि चलब झपटमार जेंका
सरकारी खरांत लेल बेहाल भेल
लोक करे लूटमार जेंका.

लोभी लोकक भीड़ मे केकरा समझाएब
"
कारीगर" बैसल अछि चुपचाप बौक जेंका
बेईमान लोक नहि ईमानदारी सीखत?
लोक करे लूटमार जेंका.

डेग-डेग पर भ्रष्टाचारी भेटत 
ओ जाल बिछौने  बैसल अछि
चालि चलब प्रोपर्टी दलाल जेंका
लोक करे लूटमार जेंका.

सरकारी व्यबस्थाक हाल बेहाल
भ्रष्टाचारक बढ़ी गेल अछि मकड़जाल
एही ओझरी मे ओझराएल कतेक लोक
मुदा नेता नाचै अपने ताल.

जनताक नाम पर फुसियाहिंक जनसेवा
नेतागिरी के धंधा चमकि गेल
सभ खाए रहल सरकारी मेवा
जहिना बाढ़ी मे अपटल माछ कतेक रेवा.

बेमतलब के करै विदेश यात्रा
विकसित योजनाक नाम पर
बेहिंसाब खर्च करै जेना
सरकारी धन छैक ओक्कर बपौती जेंका.

बाढ़ी-सुखार सँ लोक तबाह भेल
मुदा कोनो स्थाई समाधान नहि कराउत
हवाई सर्वेक्षण मे नेता जी
फुसियांहिक बिधि टा पुराउत.

राहत आ बचाव के नाम पर
रहत पैकेजक बंदरबांट भ रहल
उज्जर कुरतावला सभ सँ आगू
ओक्कर चालि चलब झपटमार जेंका.



अक्टूबर 02, 2012

पंडा आ दलाल (हास्य कविता)

पंडा आ दलाल
(हास्य कविता)

एकटा गप साफे बुझहू त
ई दुनू ममिऔते पिसिऔते छि

एकटा अछि जं पंडा
त दोसर अछि दलाल.

साहित्यों आब एकरा दुनू सँ
अछूत नहि रहि गेल
पंडा बैसल अछि पटना में
त दिल्ली में बैसल अछि दलाल.

सभटा साहितिय्क आयोजन में
रहबे करत एककर सझिया-साझ
हँ ओ में छि नहियों में छि
सभटा लकरपेंच लगाबै तिकडमबाज.

की दरभंगा आ की कलकत्ता?
सभ ठाम बैसल अछि तिकडमबाज
अपना-अपना ओझरी में ओझरौत
आ सुढ़िये नहि देत कोनो काज.

पहिने ई काज हमही शुरू केलौहं
बड़-बड़ बाजै भाषाई पंडा
धू जी एककर श्रेय त हमरा
ताहि दुआरे अपस्यांत भेल दलाल.

खेमेबाजी आ गुटबाजी केलक
सत्य बजनिहार के धमकी देलक
अपना स्वार्थ दुआरे ई सभ
भाषा साहित्यक सर्वनाश करेलक.

अपने मने बड्ड नीक लगइए
मुदा आई "कारीगर" किछु बाजत
कहू औ पंडा आ दलाल
एहेन साहित्य समाज लेल कोन काजक?

साहित्य समाज जाए भांड में
एकटा दुनू के कोन काज
साहित्यक ठेकेदारी शुरू केलक
ई दुनूटा भ गेल मालामाल.

सितंबर 23, 2012

फुसियाँहिक झगड़ा (हास्य कविता)

फुसियाँहिक झगड़ा

(हास्य कविता)

जतैए देखू ततैए देखब झगड़ा


बेमतलबो के होइए रगरम-रगड़ा

जातिवाद त कियो क्षेत्रवाद के नाम पर

लोक करै फुसियाँहिक झगड़ा।



चुनावी पिपही बजैते मातर

की गाम घर, आ की शहर-बज़ार

एहि सँ किछु होना ने जोना

मुदा लोक करै फुसियाँहिक झगड़ा।



फरिछा लेब, हम ई त तूं ओ

हम एहि ठामहक तूं ओई ठामहक

एक्के देशवासी रहितहु हाई रे मनुक्ख

लोक करे फुसियाँहिक झगड़ा।



अपने देश मे एक प्रांतक लोक

दोसर प्रांतक लोक के घुसपैठी कहि

खूम राजनीतिक वाहवाही लूटैए

दंगा-फसाद, आ कि-की ने करैए।



नेता सबहक करनामा देखू

ओ करैथ वोट बैंक पॉलिसी के नखरा

हुनके उकसेला पर भेल धमगिज्जर

आ लोक केलक फुसियाँहिक झगड़ा।



लोक भेल अछि अगिया बेताल

नेता नाचए अपने ताल

कछमछि धेलक चुप किएक बैसब

आऊ-आऊ बझहाउ कोनो झगड़ा।



जातिवाद के नाम पर वोट बटोरू

दंगा-फसादक मौका जुनि छोड़ू

अपना स्वार्थ दुआरे भेल छी हरान

क्षेत्रवादक आगि पर अहाँ अप्पन रोटी सेकू।



की बाबरी आ की गोधरा कांड

बेमतलब के भेल नरसंहार

कतेक मरि गेल, कतेको खबरि नहि

मुदा एखनो बझहल अछि सियासी झगड़ा।



देश समाज जाए भांड़ मे

नेता जी के कोन छनि बेगरता

जनता के बेकूफ बनाउ

हो हल्ला आ कराऊ कोनो झगड़ा।





सितंबर 01, 2012

फोंफ काटि रहल सरकार (हास्य कविता)

फोंफ काटि रहल सरकार
              (हास्य कविता)
रंग विरंगक डिग्री डिप्लोमा लेने
रोड पर घूमि रहल युवक बेकार
देशक कर्ता-धर्ता चुप्पी लधने छथि
आ फोंफ काटि रहल सरकार।
 
बुनियादी शिक्षाक दरस एक्को मिसिया ने
खाली किताबी ज्ञान देल गेल छैक
आ परीक्षा पास कए डिग्री लेने
घूमि रहल अछि युवक बेरोजगार।
 
ओकरा नहि कोनो लुड़ि-भास
तोतारंटत आ परीक्षा पास
बेबहारिक जिनगी मे फेल भ गेल
कियो भूखले मरै अहाँ के कोन काज।
 
परीक्षा प्रणाली आ पाठ्यक्रम एहेन किएक
अहिं फरिछा के कहू औ सरकार
फुसियाँहिक डिग्री डिप्लोपा कोन काजक
कतेक लोक एखनो अछि बेकार।
 
कुर्सी पर बैसल छी त कोना बुझहब
कि होइत छैक लाचारी आ बेकारी
रोजगारक अवसर बंद केलियै
कतेक बढ़ि गेल अछि बेरोजगारी।
 
अहिंक पैरवी पैगाम सँ
अलूइड़ लोक सभ के नोकरी भेट गेल
मुदा मेहनत क पढ़निहार सभ
पक्षपात नीति दुआरे बेकार भ गेल।
 
दू टा पद दू लाख आवेदन कर्ता
एकटा पद मंत्री कोटा सँ
विज्ञापन पूर्व फिक्स भेल अछि
बिधपुरौआ परीक्षा टा करौताह।
 
मेहनत क ईमानदारी सँ
लिखित परीक्षा पास क लेब
मुदा इंटरव्यू मे अहाँ के
तेरह डिबिया तेल जरतौह।
 
ईमानदारी पर अड़ल रहब कारीगर
त इंटरव्यू मे कैंची चलत
योग्यता रहैतो अहाँ भ जाएब बेकार
मुदा फोंफ काटि रहल सरकार।।                

अगस्त 27, 2012

घोंघाउज आ उपराउंज (हास्य कविता)

घोंघाउज आ उपराउंज

(हास्य कविता)



हम अहाँ के गरिअबैत छि

अहाँ हमरा गरिआउ

बेमतलब के करू उपराउंज

धक्कम-धुक्की करू खूम घोघाउंज.



कोने काजे कहाँ अछि

आब ताहि दुआरे त

आरोप-प्रत्यारोप मे ओझराएल रहू

मुक्कम-मुक्की क करू उपराउंज .



श्रेय लेबाक होड़ मचल अछि

अहाँ जूनि पछुआउ

कंट्रोवर्सी मे बनल रहू

फेसबुक पर करू खूम घोघाउंज.



मिथिला-मैथिल के नाम पर

अहाँ अप्पन रोटी सेकू

अपना-अपना चक्कर चालि मे

रंग-विरंगक गोटी फेकू.



अहाँ चक्कर चालि मे

लोक भन्ने ओझराएल अछि

अहाँ फेसबूकिया ग्रुप बनाऊ

अपनों ओझराएल रहू हमरो ओझराऊ.



ई काज हमही शुरू केलौहं

नहि नहि एक्कर श्रे त हमरा अछि

धू जी ई त फेक आई.डी छि

अहाँ माफ़ी किएक नहि मंगैत छी?



बेमतलब के बड़-बड़ बजैत छी

त अहाँ मने की हम चुप्पे रहू?

हम की एक्को रति कम छी

फेसबुक फरिछाऊ मुक्कम-मुक्की करू.



आहि रे बा बड्ड बढियां काज

गारि परहू, लगाऊ कोनो भांज

कोनो स्थाई फरिछौठ नहि करू

सभ मिली करू उपराउंज आ घोंघाउज.