अगस्त 27, 2012
अगस्त 01, 2012
अहींटा एकटा नीक लोक छी . ( हास्य कविता)
अहींटा
एकटा नीक लोक छी
.
हास्य कविता
हास्य कविता
"कारीगर" कतेक दिन बाद परीक्षा पास केलक
ओ त बड्ड बुडिबक अछि
अहाँ त बड्ड पहिने बड़का हाकिम बनि गेलौहं
ताहि द्वारे अहींटा एकटा नीक लोक छी .
अहाँक सफलताक राज त
कहियो ने कियो कही सकैत अछि
अहाँ अपने लेल हरान रहैत छी
आ अहींटा एकटा नीक लोक छी .
सर समाज सँ कोनो मतलब नहि रखलौहं
परदेश मे दूमंजिला मकान बना लेलौहं
गाम घर सँ स्नेह रखनिहर कें
अपनेमने अहाँ बुडिबक बुझहैत छी .
अप्पन सभ्यता संस्कृति अकछाह लगइए
ओकरा अहाँ बिसरै चाहैत छी
परदेश मे रंग-बिरंगक संस्कृति मे
अहाँ के नीक लगइए खूब मगन रहैत छी.
धियो-पूता के मातृभाषा नहि सिखबैत छि
ओकरा अंग्रेजी टा बजै लेल कहैत छी
मत्रिभाषक आंदोलन चलौनिहर बुडिबक
आ अहींटा एकटा नीक लोक छी.
गाम घर पछुआएल अछि रहिए दिऔ
नहि कोनो माने मतलब राखू
अहाँ ए.सी. मे बैसल आराम करैत छि
अहींटा एकटा नीक लोक छी.
सर-समाज सँ स्नेह रखलौहं तहि द्वारे
हम बकलेल बुडिबक घोषित भेल छी
अहाँ रुपैया कम ढ़ेरी लगेलौहं
तहि द्वारे अहींटा एकटा नीक लोक छी.
खली रुपैया टा चिन्हैत छी
अहाँ बिधपुरौआ बेबहर करैत छी.
पाइए अहाँ लेल सभ किछु
आ अहीं टा एकटा नीक लोक छी.
कियो पहिने कियो बाद मे
मेहनत करनिहार त सफल हेबे करत
ओकरा अहाँ प्रोत्साहित कियक नहि करैत छी?
यौ सफलतम मनूख अहींटा एकटा नीक लोक छी.
जुलाई 26, 2012
मुखिया जी देथहिन (हास्य कविता)
मुखिया जी देथहिन
(हास्य कविता)
बेमतलब के कोनो काज राज करैत छि
हम त कहब एक्को टा खरहो ने खोंटू
अहाँ हुनका वोट द दिऔन
सब किछु त मुखिया जी देथहिन.
जबनका के बिरधा पिलसिन
बुढ़बा सब के जबनका पिलसिन
व्यर्थ समय गमाऊ त बेकारी पिलसिन
सभटा पिलसिन त मुखिया जी देथहिन.
डिग्री डिप्लोमा नहि अछि तै सँ की ?
आब पढाई लिखाई एकदम नहि करू
हरदम हुनके संपर्क में रहू
शिक्षामित्र के नोकरी त मुखिया जी देथहिन.
सरकारी खरांत हाई रे पंचायती राज
आब रही नहि गेल कोनो काज राज
बिरधा पेसन पास कराऊ कामिसन खाऊ
रुप्पैयाक बंदरबांट त मुखिया जी करथिन.
ईंटाघर वाला के इंदिरा आवास
टूटलाहा घर वाला के लागल तरास
भुखले मरी जायब त बी. प. एल.
अन्तोदय योजना में फेल भेलौहं की पास ?
अप्पन काज राज छोडि के
ब्लोकक चक्कर लगाऊ
मुखिया जी त भेंट भए जेताह
चाहो पान के खर्च त उहे देथहिन.
कमाए खटाए के अहाँ करब की ?
फुसियाँहिक हर कियक जोतब
बँटा रहल अछि सरकारी खरांत
अहाँ दौगल जाउ बाद में हमरा नहि टोकब.
मंगनी के चाउर दाइल सँ पेट भरी जायत
कहियो भुखले नहि अहाँ मरब
कोई ने अहाँ के टोके मुखिया जी ओ.के.
मुखीये जी के कहल टा अहाँ करब.
राहत पैकेज के हेरा फेरी केलन्हि
आब आंखि हुनकर चोन्हरेलैंह
सरकारी लिस्ट में अहींक नाम टा अछि
ओई पर साइन त मुखिया जी कर्थिहीन.
लेखक- किशन कारीगर
(हास्य कविता)
बेमतलब के कोनो काज राज करैत छि
हम त कहब एक्को टा खरहो ने खोंटू
अहाँ हुनका वोट द दिऔन
सब किछु त मुखिया जी देथहिन.
जबनका के बिरधा पिलसिन
बुढ़बा सब के जबनका पिलसिन
व्यर्थ समय गमाऊ त बेकारी पिलसिन
सभटा पिलसिन त मुखिया जी देथहिन.
डिग्री डिप्लोमा नहि अछि तै सँ की ?
आब पढाई लिखाई एकदम नहि करू
हरदम हुनके संपर्क में रहू
शिक्षामित्र के नोकरी त मुखिया जी देथहिन.
सरकारी खरांत हाई रे पंचायती राज
आब रही नहि गेल कोनो काज राज
बिरधा पेसन पास कराऊ कामिसन खाऊ
रुप्पैयाक बंदरबांट त मुखिया जी करथिन.
ईंटाघर वाला के इंदिरा आवास
टूटलाहा घर वाला के लागल तरास
भुखले मरी जायब त बी. प. एल.
अन्तोदय योजना में फेल भेलौहं की पास ?
अप्पन काज राज छोडि के
ब्लोकक चक्कर लगाऊ
मुखिया जी त भेंट भए जेताह
चाहो पान के खर्च त उहे देथहिन.
कमाए खटाए के अहाँ करब की ?
फुसियाँहिक हर कियक जोतब
बँटा रहल अछि सरकारी खरांत
अहाँ दौगल जाउ बाद में हमरा नहि टोकब.
मंगनी के चाउर दाइल सँ पेट भरी जायत
कहियो भुखले नहि अहाँ मरब
कोई ने अहाँ के टोके मुखिया जी ओ.के.
मुखीये जी के कहल टा अहाँ करब.
राहत पैकेज के हेरा फेरी केलन्हि
आब आंखि हुनकर चोन्हरेलैंह
सरकारी लिस्ट में अहींक नाम टा अछि
ओई पर साइन त मुखिया जी कर्थिहीन.
लेखक- किशन कारीगर
जून 19, 2012
पद के दुरूपयोग (हास्य कविता)
पद के दुरूपयोग
(हास्य कविता)
फेर भेटत नहि एहेन सुयोग
अपना स्वार्थ द्वारे कानून बनाऊ-तोरू
मनमर्जी सँ करू ओकर उपयोग
अहाँ करू अपना पद के दुरूपयोग
सत्ताक कुर्सी पर बैसल छि अहाँ
कोनो समस्या देखैत छि कहाँ
मोन मोताबिक सी.बी.आइ के करू उपयोग
अहाँ करू अपना पद के दुरूपयोग !
अरब-खरब घोटाला करू मुदा
दाँत चिआरैत तिहर जेल सँ निकलू
फेर मंत्री पद हथिआउ आ घोटाला करू
सरकारी खजाना सुडाह क बैसू !
सत्ता कुर्सी आ सरकारी धन
जन्मजात अहाँक बपौती छि
अहाँ करू एककर खूब उपयोग
करू अपना पद के दुरूपयोग
मूलभूत समस्याक समाधान किएक करब ?
एही सँ किछु ने होयत ताहि दुआरे
एहने योजना बनाऊ जाही सँ
अहाँ अप्पन जेबी टा भरब
करू अन्याय मुदा बर्दी चमकाऊ
अपनों घुस खाऊ नेताजी के सेहो खुआउ
डरे कियो किछु बाजत कोना
दमनकारी नीति अहाँ अपनाऊ
न्यायक कुर्सी बिका गेल
देशक रक्षक बनी गेल भक्षक
कागजी पन्ना पर आर्थिक योजना
आम आदमीक कष्ट बुजहब कोना
मंत्री छि लालाबती गाड़ी में घूमूं
जनताक खोज खबरि एकदम नहि करू
एक्के बेर आब अगिला इलेक्शन में
भोंट दुआरे जनता के मुहं देखू
दंगा फसाद अहींक इशारा पर
पहिने सँ फिक्स भेल अछि
वोट बैंक पोलिसी के करू उपयोग
अहाँ करू अपना पद के दुरूपयोग !!
लेखक :- किशन कारीगर
जून 07, 2012
ऐना किएक ई की ? हास्य कविता
ऐना किएक ई की ?
हास्य कविता
एक्के कोइख सँ जनमल दुनू
बेटा के डाक्टरी इंजीनियरिंग कराऊ
मुदा बेटी के संस्कृते सँ मध्यमा कराऊ
एहेन बेईमानी ऐना किएक ई की ?
दूल्हा अहाँ गरम-गरम खीर खाऊ
अप्पन सुखलाहा देह के फुलाऊ
दुल्हिन भुखले सन्ठी जेंका सुखाऊ
ओकरा ने अहाँ सब पढाऊ-लिखाऊ ||
बेटी के पढ़ा लिखा के करब की ?
ओकरा त चूल्हे फूकै लेल कहैत छी
मुदा बेटा के पढ़ा लिखा के
दाम दिग्गर में रुपैया खूब गनबैत छी ||
हाय रे नारा लगौनिहार सभ
कागजी पन्ना पर बेटा बेटी एक समान
मुदा असलियत में बेटा तों स्कूल जो
बेटी तों भनसा-भात के कर ओरीयान ||
दुनू त अहींक संतान छी
फेर एहेन बेईमानी ई की?
बेटियों के पढ़ा लिखा मनूख बनाऊ
अहाँ ओकरो त शिक्षित प्रशिक्षित बनाऊ ||
बेटा के पढबय के खर्चा
अहाँ बेटीवाला सँ वसूल करैत छी
हाय रे दहेज़ लोभी दलाल
अहाँ के तैयो संतोख नहि भेल ई की ?
सामाजिक विकास लेल कही लेल "कारीगर"
मुदा अहाँ इ गप किएक नहि बुझहैत छी
समाज सँ पैघ अहाँक अप्पन स्वार्थ
एहेन जुलुम ऐना किएक ई की ?
रुपैया गनै सँ नीक त ई
जे बेटी के शिक्षित बनाऊ
नहि गनाब रुपैया आ नहि केकरो सँ गनायब
एखने सभ गोटे मिली सप्पत खाऊ ||
समाज आगू बढ़त त उन्नति होयत
ई गप अहाँ किएक नहि बुझहैत छी
आबो संकीर्ण सोच बदलू
एही सँ बेसी फरिछा के "कारीगर" कहत की ?
मई 18, 2012
आब हम जबान भ गेलहुँ (हास्य कथा)
आब हम जबान भ गेलहुँ
(हास्य कथा)
समाचार पढ़ि के स्टूडियो सँ निकलले रही कि मोबाइलक घंटी बाजल हम धरफरा के
फोन उठेलहुँ की ओम्हर सँ अवाज आयल हौ कारीगर आब हम जवान भ गेलहुँ। ई सुनि त
हमरा किछु ने फुरा रहल छल मुदा तइयो हम सहास कए के बजलहुँ अहाँ के बाजि
रहल छी। ओम्हर सँ फेर अवाज आयल हौ कारीगर एना किएक बताह जेंका बजैत छह
अवाजो ने चिन्हैत छहक। कहअ त इहे गप ज कोनो बचिया तोरो फोन कए के कहने
रहितह त तोरो मोन धनकुटिया मशिन जेंका धक-धक करितह। मुदा हम कहैत छियह त
तों बहन्ना बतियाअैत छह।
हम बजलहुँ से गप त ठीके
मुदा अहाँ के बाजि रहल छी से कहू ने तखने चिन्हब ने कि ओम्हर सँ फेर अवाज
आएल हौ बच्चा हम बाबा भोलेनाथ बाजि रहल छी तोरे स भेंट करैए लेल आएल छलहुँ।
ई सुनि हम बाबा के प्रणाम कए पुछलियैन यौ बाबा अहाँ कतेए छी। ओ खिसियाअैत
बजलाह हौ बच्चा हम यूनिवार्ता लक ठाढ़ भेल छी तोहर आकाशवाणीबला सभ कहलक जे
बसहा बरद लए के भीतर नहि जाए देब। तहि दुआरे हम यूनिवार्ता चलि अएलहुँ अहि
ठाम कोनो रोक टोक नहि बसहो बरद मगन स घास खा रहल अछि आ हमहूँ रौद मे बैसल
छी। तूं जल्दी आबह देखैत छहक सस्पेन महक चाह उधिया-उधिया कहि रहल अछि जे आब
हम जवान भ गेलहु। दुनू गोटे चाहो पीअब आ गपो नाद करब।हम बजलहुँ ठीक छै
बाबा अहाँ ओतए रहू हम 5 मिनट मे आबि रहल छी।
बाबा सँ भेंट करबाक
लेल हम आकाशवाणी के गेट न0-2 स बाहर निकैलि रोड टपि के पीटीआई बिल्डिंग लक
आएले रहि कि फेर फोनक घंटी बाजल। कान मे हेडफोन लगले रहैए बिना नम्बर
देखनहियै हम फोन उठेलहुँ कि ओम्हर सँ अवाज आयल यौ किशन बौआ अहाँ कहिया गाम
आबि रहल छी आब हम जवान भ गेलहुँ। हम धरफराइत बजलहुँ ग ग गोर लगैत छि काकी।
ओम्हर सँ फेर कोनो महिलाक अवाज आयल अई यौ बौआ अहाँ सभ दिन बकलेले रहबैह
भौजी के लोक कहूं काकी कहलकैए ओ खिखिया के हँसैत बजलीह अप्पन सप्पत कहैत छी
यौ बौआ आब हम जवान भ गेलहुँ। अहाँ त साफे हमरा बिसैर गेलहुँ कहियो मोनो ने
पड़ैत छी। ई सुनि त एक बेर फेर हमरा किछु ने फुरा रहल छल मुदा तइओ हम
बजलहुँ अहाँ कतए स बाजि रहल छि यै काकी। महिलाक अवाज आयल यौ बौआ हम भराम
वाली भाउजी बाजि रहल छी। एक्को रति मोन पड़ल ।हम अपसियाँत भेल हकमैत बजलहुँ ह
ह भाउजी मोन पड़ल अच्छा त अहाँ छि भराम वाली। भाउजीक गप सुनि त हँसि स हमरा
रहल नहि गेल हा हा क हँसैत हम बजलहुँ अई यै भाउजी अहाँक चिल्का बच्चा नमहर
भ गेल आ तइयो अहाँ कहैत छी जे आब हम जवान भ गेलहुँ ठीके मे की मजाक कए रहल
छी।
भाउजी खिखिया क हँसैत बजलीह अप्पन सप्पत कहैत छि यौ बौआ अहाँ
एक बेर गाम आबि देखू हमरा देखि त बुढ़बो सबहक धोति निचा माथे ससैर जायत
छैक। आ तहू स बेसी हाल त मैटिक वला विद्यार्थी सभहक हाल त और बेहाल छैक।
टीशन पढै जायत काल हमरे घूरि घूरि क देखैत रहैत छैक आ सबटा सुध बुध बिसैर
के धरफड़ा के साइकिलो पर स खसि पड़ैत छैक। सबटा गप कि कहू यौ बौआ गाम-गमाइत
जेनिहार अनठिया लोक सभ त मोटरसाइकिल पर सँ ओंघरा पोंघरा के खसि पडैत छैक आ
मुँहो कान चिक्कन भए जायत छैक।हम बजलहुँ अई यौ भाउजी भैया नहि किछु कहैत
छथि हुनका ने किछु होइत छैन्हि। भाउजी बजलीह धू जी महराज की कहू आनहरो लोक
अहाँ भैया स बेसी देखैत हेतै। पामर वला चश्मा मे एक्को रति कि अहाँ भैया के
देखाइए। सबटा गप कि कहू अहाँ भैया के हकैम-हकैम के कहैत कहैत हम थाकि
गेलहुँ जे आब हम जवान भ गेलहुँ। मुदा तइयो अहाँ भैया के वैहए गउलहे गीत
इस्कूल पर सँ गाम आ गाम पर सँ इस्कूल सेहो आखि मुनने जाउ आ आउ। रस्ता पेरा
कि सभ भेलै सेहो ने बुझबाक काज। ई गप सुनि त हँसि स हमरा रहल नहि गेल हा हा
क हँसैत हम बजलहुँ आहि रे बा एहेन जुलुम त देखल नहि।
हमर गप सुनि
भाउजि खूब जोर स खिखिया क हँसैत बजलीह जुलुम की महाजुलुम कहियोअ। ओना अहूँ
कि अपना भैया स एक्को रति कम छी। अहाँ त हरदम समाचार बनबै-सुनबै मे बेहाल
रहैत छी हमर हाल के पुछैए। आई काल्हि त आनहरो लोक ईशारा स गप बुझि जायत छैक
मुदा अहुँक हाल त निछटे आनहर वला अछि ने गबैए जोकर ने सुनैए जोकर। अहाँ स
नीक त कोनो अनठिया के कहने रैहतियै जे आब हम जवान भ गेलहुँ त निछोहे पराएल ओ
गाम चलि आएल रहितैह मुदा अहाँ त गाम अएबाक नामे नहि लैत छी। हम बजलहुँ
भाउजी अहाँ जुनि खिसियाउ अहि बेर नहि त अगिला बेर हम जरूर आएब आ दुनू दिअर
भाउज उला ला उ ला ला मदमस्त होरी खेलाएब। एखन हम फोन राखि रहल छी केकरो फोन
आबि रहल छैक। भाउजी बजलीह मारे मुँह ध के अहूँ के मोबाइल हरदम टनटनाइते
रहैए भरि मोन गप करब सेहो आफद। जहिना जवान लोक फेनाइते रहैए तहिना अहाक फोन
टनटनाइते रहैए बड्ड बढ़िया त राखू।
भाउजीक फोन
डिसकनेक्ट करैते मातर फेर कोनो अनठिया नम्बर सँ फेर फोनक घंटी बाजल अवाज
सुनि हमर मोन धकधकाएल जे आब फेर के अछि। हम हेल्लो बजलहुँ कि ओम्हर स अवाज
आएल एकटा गप बुझहलियै अहाँ । हम बजलहुँ बिना कहनहिए अपनेमने अन्तरयामी केना
बुझि जेबैए ओना कोन एहेन जुलुम भए गेलैए से जल्दीए कहू। कोनो महिलाक अवाज
आयल यौ पाहुन हम कोना क कहू हमरा त लाज होइए। हम बजलहुँ अहाँ के लाजो होइए आ
उल्टे हमरा पाहुनो कहैत छी। ओम्हर स फेर अवाज आयल चुपु ने अनठिया
अनठा-अनठा के बजैत छी जेना अहाँ के बुझहले ने हुएअ ।हम बजलहुँ सत्ते कहैत
छी हमरा त एक्को मिसीया ने बुझहल अछि जल्दी कहू। एतबाक मे फेर अवाज आयल अहा
कहैत छी त हयैए लियअ सुनू आब हम जवान भ गेलहुँ। एतबाक बाजि ओ हा हा के खूब
जोर स हँसैए लगलीह। हुनकर गप सुनि त हँसि स हमरा रहल नहि गेल मुदा तइयो हम
बजलहुँ जबान भ गेलहुँ त अपना माए बाप के कहियौअ अहि मे हम कि करू। ओ बजलीह
अई यौ बुढ़बा पाहुन अहूँ बरि खान्हे बुझहैत छियैक। कहू त इहो गप केकरो कहैए
पड़तैह लोक अपने मने नहि बुझतैह जे घोरि घोरि के कहैए पड़तैह जे आब हम जबान भ
गेलहुँ। एतबका बाजि ओ खूब जोर स हाँ हाँ के हसैए लगलीह। ओइ महिलाक हँसि
सुनि त बुझहु हमर मोन धनकुटिया मशिन जेंका धक-धक करैए लागल। हकमैत हकमैत
अपसियात भेल हम बजलहुँ अईं यै मैडम अहाँ जबान नहि भेलहुँ कि बुढ़ारि मे हमरा
जहल टा कराएब। ओ बजलीह अईं यौ पाहुन अहाँ के डर किएक होइए एतेक काल त कोनो
अनठिया गाम चलि आएल रहैतैए आ अहाँ के त होरी मे गाम अबैत बड्ड माश्चर्ज
लगैए अहाँ होरी खेलाए लेल गाम आएब कि नहि। हम बजलहुँ अहाँक पाहुन से कहिया स
त ओ बजलीह अईं यौ पाहुन हम जवान भेलहु आ हमरा अहा साफे बिसैर गेलहु। हम
नीलू बाजि रहल छी एक्को रति मोन पड़ल कि नहि।
हम बजलहुँ अच्छा त
अहाँ छी बड्ड जल्दी जबान भ गेलहुँ। ओ महिला बजलीह त अहाँ मने कि अगिला
कोजगरा तक अहाँक बाट तकितहुँ कि अपन जबान भ गेलहुँ। आब बुढ़ लोकक जमाना
गेलैए आई काल्हि त जबान लोकक जमाना एलैए बुढ़ारी मे अहाँ भसिया गेलहुँ की।
हमरे छोटकी सारि नीलू छलीह। हुनकर एहेन सुनर बचन सुनि त हम अपना देह मे
अपने मने बिट्ठू काटैए लगलहु खुशि सँ मोन मयूर जेंका नाचए लागल। भेल जे
सासुरे मे तिलकोरक तरूआ खा रहल छी मुदा फोन दिसि देखि इ भ्रम टूटल जे हम त
संसंद मार्ग दिल्ली मे छी आ फोन पर गप कए रहल छी। हम बजलहुँ यै नीलू ठीक
छैक ई बुझहु जे अगिला होरी मे हम एब्बे टा करब एतबाक कहि हम फोन राखि
देलियै।
फोन पर गप करैते करैते हम चाह दोकान लक चलि आएल रहि
सेहो नहि बुझहलियै। हमरा देखैत मातर बाबा बजलाह अईं हौ कारीगर तोहर गप
सधलहे नहि देखैत छहक तोरा फेरी मे चाहो ठंढ़ा गेल तहि दुआरे चाहो वला हमरे
पर मुँह फुलेने अछि। बाबाक गप सुनि हुनका हम प्रणाम कए पुछलियैन से किएक यौ
बाबा। त ओ बजलाह चाहवला के कहब छैक जे अहि दारही वला बाब दुआरे कएक टा
न्यू कपल्स माने जबान छौड़ा-छौंड़ी बिना चाह पीने आपिस चलि गेलैह। आब तोंही
कहअ त कारीगर छौंड़ा-छौंड़ी त अपना फेरी मे गेल चाह नहि बिकेलै त एहि मे हमर
कोन दोष। चाहवला अपने मिथिला के रहैए ओकरा हम कहलियै हौ भाए दू कप चाह
बनाबह बाबा सेहो पिथहिन। हम बाबा के कहलियैन बड्ड दिन बाद अपने दिल्ली
अएलहुँ त गाम घरक हाल समाचार कहू। बाबा बजलाह हौ बच्चा जुनि पुछह गाम घरक
हाल बुझहक छौंड़ा छौंड़ी अगिया बेताल। हम बजलहुँ से किएक यौ बाबा त ओ बजलाह
हौ बच्चा गामो घर रहबा जोग नहि रहि गेल। आई काल्हिक छौंड़ा छौंड़ी एकदम
निरलज भए गेल एक्को रति लाज धाक नहि रहि गेलैए आब त मंदिरो मे रहब परले काल
भए गेल।
हम बजलहुँ से किएक यौ बाबा त ओ बजलाह हौ बच्चा सबटा गप
तोरा कि कहियअ आब त छौंड़ा मारेर सभ पूजा करैत काल उला ला उला ला गबैत अछि
एतबाक सुनैते मातर छौंड़ियो सभ कुदि-कुदि के कहतह छुबू ने छुबू हमरा आब हम
जवान भ गेलहुँ। कह त के जबान के बुढ़ पुरान से त पूरा गौंआ बुझैत छैक एहि मे
हल्ला करबाक कोन काज जे आब हम जबान भ गेलहुँ। देखैत छहक इ गप सुनि त बुढ़बो
सबहक धोति निच्चा माथे ससैर जाएत छैक। ई भागेसर पंडा हमरा सुखचेन स नहि
रहैए देत। एतबाक मे चाह वला 2 गिलास चाह देलक दुनू गोटे चाह पिबअ लगलहुँ एक
घोंट चाह पिनैहे रहि कि हम पुछलियैन भागेसर कि केलक यौ बाबा। ओ बजलाह हौ
कारीगर की कहियअ भागेसर पंडा त आब निरलज भ गेल। एतेक दिन ओम नमः शिवाय के
जाप करैत छल आब उला ला उला ला गबै मे मगन रहैए हम जे किछु कहैत छियैक हौ
भागेसर एना किएक अगिया बेताल भेल छह। त ओ हमरा कहैत अछि यौ बाबा किछु कहू
ने हमरा आब हम जबान भ गेलहुँ।
अप्रैल 29, 2012
हँ मे हँ मिलाऊ -(हास्य कविता)
खादिक अंगा पहिर पार्टि ऑफिस मे जल्दी आऊ
शहर बजार खूम दंगा कराऊ
करू चापलूसी एक्को रति ने लजाऊ
नेता जी के हँ मे हँ मिलाऊ।
चुनावी घोषणा भ गेल त
टिकट लेल खूम जोर लगाऊ
देखब कहिं टिकट ने कटि जाए
तहि दुआरे हुनके हँ मे हँ मिलाऊ।
एहि बेर टिकट ने भेटल त
पार्टि ऑफिस के खूम चक्कर लगाऊ
आलाकमान के गप मानू हुनका लेल जिलेबी छानू
अहाँ टिकट दुआरे हुनके हँ मे हँ मिलाऊ।।
क्षेत्रक विकास लेल त
हम ई करब ओ करब
कोनो ठीक नहि चुनाव जीतलाक बाद
अहाँ अप्पन जेबी टा भरब।।
घोषणा पत्र मे रंग बिरंगक ऑफर
चुनावी जनसभा मे खूम चिचियाउ
एलक्सन जीतलाक बाद किछु ने करू
सरकारी रूपैया सँ विदेश यात्रा पर जाऊ।।
नहि लोकसभा त विधानसभा
एहि बेर नहि त अगिला बेर
टिकट त चाहबे करी किछु करू
अहाँ कोनो बड़का नेता के पैर पकरू।।
एलक्सन लड़ब हारब की जीतब
ई त बड्ड नीक धंधा छैक
एहेन रोजगार फेर नहि भेटत
एकरा आगू आन चिज त मंदा छैक।।
जतैए देखू ततैए एलेक्सन
साहित्य खेल आ संसद भवन
सभ ठाम भेटत एकर कनेक्सन
कुर्सी भेटत कि नहि तकरे अछि टेंशन।।
देशक जनता जाए भांड़ मे
हमरा कोन अछि मतलब
अपना स्वार्थ दुआरे एलक्सन लड़ब
खुलेआम कहू एक्को
रति ने लजाऊ।।
लेखक:- किशन कारीगर
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