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नवंबर 23, 2014

किछु फुरा गेल हमरा (काव्य संग्रह), लेखक- किशन कारीगर द्वारा लिखल पहिल पोथी, अपने सभ सुधि पाठक लोकनिक समक्ष उपलब्ध अछि. अपनेक आशिर्वचनक बाट जोहैत.....
"Kichhu Fura Gel Hamra" (Poem Collection) written by- Kishan Karigar, is now available for all of you my dear respective Reader


अगस्त 15, 2014

बीर जबान


  बीर जबान

मातृभूमीक रक्षा लेल
शहीद भऽ जाइत छथि बीर जबान
समहारने छथि ओ देशक सीमान
नमन करैत छी हम, अहॉ छी बीर जबान।

मरब की जीयब
तेकर नहि रहैत छनि हुनका धियान
मुदा, देशक रक्षा लेल ओ सदखनि
न्योछाबर करैत छथि अपन जान।

सैनिक छथि ओ इन्सान
देशक दुशमन पर रखैत छथि धियान
आतंकवादीक छक्का छोड़ा दैत छैक
परमवीर छथि, हिन्दुस्तानक बीर जबान।

महान छथि ओ बीर जबान, देशक खातिर
जे हॅंसैत-हॅंसैत देलथिहिन अपन बलिदान
भारतवासी गर्व करैत अछि अहॉ पर
नहि बिसरत कहियो अहॉक त्याग आओर बलिदान।

सीमा पार सॅं, केलक आतंकी हमला
कऽ देलियै आतंक के मटियामेट अहॉं
भऽ गेलहु अपने लहु-लुहान मुदा
आतंक सॅं बचेलहु सभहक जान

कारगील सॅ कूपवाड़ा तक
आतंकवादी सॅं लैत छी अहॉं टक्कर
अहॉंक बीरता देखी कऽ
अबैत छैक ओकरा चक्कर।

बीर जबान यौ बीर जबान
समहारने छी अहॉं देशक सीमान
कोना कऽ हेतै देशक रक्षा
सदखनि अहॉ रहैत छी हरान।
                     कवि:- किशन कारीगर
(कॉपीराइट नियम मोताबिक@ लेखक नामे सर्वाधिकार सुरक्षित).




अगस्त 09, 2014

बारूद के ढ़ेड़ी पर बैसल

बारूद के ढ़ेड़ी पर बैसल 

बारूद के ढ़ेड़ी पर बैसल हम 
अट्टहास क हंसी रहल छी 
मिसायल हमला स उड़ा देब 
हम अहाँ के नेस्तनाबूद क देब.

हमरा लक एतेक परमाणु शक्ति अछि
हम अप्पन शक्ति प्रदर्शन केलौहं 
हमरा सिमान में उड़ल जहाज के 
अपनेमन ड्रोन हमला स उड़ा देब

त्रादसि मचल, निर्दोष मारल गेल
एहि स केकरो की?
सभ अपना परमाणु प्रदर्शन में बेहाल
मानवताक विनाश करै में लागल छि.

हाहाकार मचल, लोक अधमरू भेल
कोन दिसि जाउ सगतरि विनाश
बारूदी अगिलग्गि में लोक उजड़ी गेल
मुदा तइयो हवाई हमला रोकल नहि गेल.

संघर्ष विरामक सप्पत खा के
फेर किएक? गोला बारूद बरसबै छि
अहाँ साम्राज्यवादी पसार दुआरे सगतरि
मानवताक विनाश पर, उतारू भेल छि.

पहिल आ दोसर विश्वयुद्धक भीषण
दुष्परिणाम भोगि चुकल समूचा विश्व
आबो मानवताक रक्षा लेल सचेत भ' जाउ
कहीं ई तेसर विश्वयुद्धक संकेत, नहि त छि?

कोनौहं विवादक फरिछौठ सभ देश मिली
शांति समझौता सँ कएल करू
गोला बारूद स विनाश टा होएत
किएक नहि एक बेर ई गप सोचैत छि.
कवि- किशन कारीगर
(नोट- कॉपीराइट अधिनियम@ लेखक नामे सर्वाधिकार सुरक्षित).

अप्रैल 01, 2014

संपादक स्वर्गवासी भ गेलाह


संपादक स्वर्गवासी भ गेलाह

अत्यंत प्रस्सान्तक संग सूचित क रहल छि जे आजुक शुभ दिन के शुभ मूहर्त में भिंसुरका पहर मिथिलांचल टुडे केर (सम्पादक) सोझहे सवर्गलोक पहुंच गेलाह. अतिथि संपादक अट्टहास करैत ई सूचना देलैन जे मृतक लेल एकटा मौन श्रद्धांजलि सभा केर आयोजन - (मावलंकर हॉल) दिल्ली में साँझुक पहर ५;५५ में  केएल जायत. इच्छुक व्यक्ति अपना बजट केर मोताबिक मधुर नेने अबश्य आबि.

                                                                              अपनेक स्वर्गवासी (संपादक)


अक्टूबर 06, 2013

पंडित रामाशीष पाठक के विनम्र श्रद्धांजलि


प्रसिद्ध पखावज वादक पंडित रामाशीष पाठक आब हमरा लोकनिक विच नहि रहला, हूनकर  निधन भ गेलइन। अमता घरनाक पंडित रामाशीष पाठक के विनम्र श्रद्धांजलि..अप्पन पखावज वादन लेल ओ प्रसिद्ध आ संगीत नाटक अकादेमी सहित कतेको पुरस्कार सं अलंकृत भेल छलाह..पंडित जी के निधन शास्त्रीय संगीत जगत लेल एकटा अपूर्णीय क्षति अछि...विनम्र श्रद्धांजलि ... 

फ़रवरी 08, 2013

मनुक्ख बनब कोना?


मनुक्ख बनब कोना?

छीः छीः धूर छीः आ छीः
मनुक्ख भ मनुक्ख सँ घृणा करैत छी
ओही परमेश्वर के बनाउल
माटिक मूरत हमहूँ छी अहूँ छी।

केकरो देह मे भिरला सँ
कियो छुबा ने जाइत अछि
आबो संकीर्ण सोच बदलू
ई गप अहाँ बुझहब कोना?

अहिं कहू के ब्राह्मण के सोल्हकन?
के मैथिल के सभ अमैथिल
सभ त मिथिलाक मैथिल छी
आबो सोच बदलू मनुक्ख बनब कोना?

अपना स्वार्थ दुआरे अहाँ
जाति-पाति के फेरी लगबैत छी
मुदा ई गप कहिया बुझहब
सभ त माँ मिथिले के संतान छी।

पाग दोपटा मोर-मुकुट
सभटा त एक्के रंग रूप छी
मिथिलाक लोक मैथिल संस्कार
एसकर केकरो बपौती नहि छी।

एकटा गप अहाँ करु धियान
सभ गोटे मिथिलाक संतान
जाति-पातिक रोग दूर भगाउ
सभ मिली कए लियअ गारा मिलान।

अपने मे झगरा-झांटी बखरा-बांटी
एहि सँ किछु भेटल नहि ने?
सोचब के फर्क अछि नहि कोनो जादू टोना
अहिं कहू आब मनुक्ख बनब कोना?

बेमतलब के गप पर यौ मैथिल
अहाँ एक दोसरा स’ झगरा करैत छी
माए जानकी दुखित भए कानि रहल छथि
ई गप किएक नहि अहाँ बुझहैत छी?

सामाजिक-आर्थिक विकास लेल काज करु
मिथिलाक माटि-पानि उन्नति करत कोना
केकरो स’ कोनो भेदभाव नहि करु
सप्पत खाउ अहाँ मनुक्ख बनब कोना?

जनवरी 12, 2013

डिनर डिप्लोमेसी (हास्य कविता)

डिनर डिप्लोमेसी

(हास्य कविता)



डिनर टेबल पर परोसल अछि

मटर पनीर आ शाही पनीर

छौंकल अछि घी देसी

आउ-आउ ई छी डिनर डिप्लोमेसी।



हम सतारूढ़ दल वला छी

आई सहयोगी दल वला लेल

डिनर माने भोज आयोजित भेल

हमरा समर्थन भेटल खूम बेसी।



आब बाहर सँ समर्थन देनिहार

बाकि रहि गेल छथि त

आई हुनके नामे राजनीतिक डिनर

ई छी डिनर डिप्लोमेसी।



अहाँ सभ जे खाएब

हम अहाँक फरमाईस पुराएब

मुदा एकटा गप कहि दि हम

बाहरि समर्थन के कहाबद्धि कराएब।



भरि पेट खाई जाई जाउ

अहाँ जे खाएब से हम खुआएब

मुदा ई कहू त चुपेचाप रहब

आ की मध्यावधि चुनाव करबाएब।



धू जी महराज अहूँ त

एकदम ताले करैत छी

खाइत-पीबैत काल ई गप नहि

पहिने दारू मँगाउ अहाँ बिदेशी।



डिनर टेबुल के नीचा मे देखू

बोतल राखल अछि देसी-बिदेशी

भरि छाक पीब लियअ

ई छी डिनर डिप्लोमेसी।



अच्छा ई कहू त सरकार

एतेक खर्चा अपना जेबी

आ कि सरकारी खजाना सँ

हमरा ध लेलक बेहोशी।



होश मे आउ गठबंधन बचाउ

हम सत्ता मे छी की कहू

अपनो खर्चा सरकारी भेल बड्ड बेसी

ई छी डिनर डिप्लोमेसी।।



कवि:- किशन कारीगर

आकाशवाणी दिल्ली।

दिसंबर 10, 2012


मिथिला  राज्य  के  धारण  में
देखल जाओ  एक  नजर
धनकर ठाकुर , कमला कान्त झा जी , विजय ठाकूर  , भीम  सिंह ,  शैलेंदर  झा  जी , इतियादी  महानु - भाव  के  उपस्थिथि  में  ,  सम्पन्य  भेल













मिथिलांचल टुडे  अध्यन  करैत   मैथिल समुदाय 











विजय ठाकुर  जी 


कमला कान्त  झा 








डॉक्टर  - गुरमैता  जी 








एक  दोसर  सन  भेट - घांट  करैत  फेस बूकिया  संघ  , जय  मैथिल - जय  मिथिला  करैत 

मिथिला राज्य के धारना  में फेस बूकिया  युबा संघ  बसन्त  झा  बत्स ,सागर मिश्र , विकास ठाकुर  , मदन कुमार ठाकुर , क्रिशन कुमार राय  (संपादक  मिथिलांचल टुडे ) जगदानन्द झा (मन्नू ) राजकुमार यादव , नीतिस  चौधरी , सत्येंदर कुमार  झा , इतियादी --

मिथिलांचल  टुडे  टीम 

 मिथिला राज्य के  धारना  में -मिथिलांचल टुडे  टीम 

मिथिला राज्य के  धारना में  मिथिलांचल  टुडे  टीम 

मिथिला राज्य के  धारना  में  मिथिलांचल टुडे  टीम 

धनाकर  ठाकू  जी   अपन  मुखरविन्द  सन  मैथिलि  आन्दोलन  के  बारे  में  चर्चा  करैत 


नवंबर 18, 2012

घोटालाबला पाइ (हास्य कविता)


घोटालाला पा
                         (हास्य कविता)


ई पोटरी त हमरा सँ 
उठने नहि उठि रहल अछि 
कनेक अहूँ जोड़ लगा दिय भाई 
ई छी घोटालावला पाई।

हम पूछलियन ई की छी 
ओ हमरा कान में कहलनि
कोयला बेचलाहा सभटा रुपैया 
हम एही पुत्री में रखने छि .

हमरा सात पुस्त लोकक गुजर
एही रुप्पैया स चली जायत
हम धरती में पैर नहीं रोपाब आई 
इ छि घोटालावला पाई।

चुपेचाप थोड़ेक अहूँ लिय 
मुदा केकरो सँ कहबई नहि भाई 
सरकारी संपित हम केलियई राई-छाई 
इ छि घोटालावला पाई।

कोयला भूखंडक बाँट-बखरा दुआरे
मंत्रिमंडल के सर्जरी भेल 
लोक हो-हल्ला केलक मुदा 
कोयला दलाली के नफ्फा हमरे ता भेल।

फेर मंत्री पद भेटैत की नहि?
ताहि दुआरे चुपेचाप पोटरी बनेलौहं 
सभटा अपने नाम केने छि भाई 
ई छी घोटालावला पाई।

देखावटी दुआरे सरकारी खजाना  पर 
बड़का-बड़का ताला लटकने छि 
मुदा राति होएते देरी हमीह 
भेष बदली खजाना लूटि लैत छी।

मंत्रीजी के कहल के नहि मानत?
सरकारी मामला में कियक किछु बाजत?
चुपेचाप सभटा काज होयत छैक औ भाई 
 ई छी घोटालावला पाई।

अक्टूबर 16, 2012

लोक करे लूटमार जेंका (हास्य कविता)

लोक करे लूटमार जेंका
                         (
हास्य कविता)

लोभी बैसल अछि लोभ मे जोंक जेंका
ओक्कर चालि चलब झपटमार जेंका
सरकारी खरांत लेल बेहाल भेल
लोक करे लूटमार जेंका.

लोभी लोकक भीड़ मे केकरा समझाएब
"
कारीगर" बैसल अछि चुपचाप बौक जेंका
बेईमान लोक नहि ईमानदारी सीखत?
लोक करे लूटमार जेंका.

डेग-डेग पर भ्रष्टाचारी भेटत 
ओ जाल बिछौने  बैसल अछि
चालि चलब प्रोपर्टी दलाल जेंका
लोक करे लूटमार जेंका.

सरकारी व्यबस्थाक हाल बेहाल
भ्रष्टाचारक बढ़ी गेल अछि मकड़जाल
एही ओझरी मे ओझराएल कतेक लोक
मुदा नेता नाचै अपने ताल.

जनताक नाम पर फुसियाहिंक जनसेवा
नेतागिरी के धंधा चमकि गेल
सभ खाए रहल सरकारी मेवा
जहिना बाढ़ी मे अपटल माछ कतेक रेवा.

बेमतलब के करै विदेश यात्रा
विकसित योजनाक नाम पर
बेहिंसाब खर्च करै जेना
सरकारी धन छैक ओक्कर बपौती जेंका.

बाढ़ी-सुखार सँ लोक तबाह भेल
मुदा कोनो स्थाई समाधान नहि कराउत
हवाई सर्वेक्षण मे नेता जी
फुसियांहिक बिधि टा पुराउत.

राहत आ बचाव के नाम पर
रहत पैकेजक बंदरबांट भ रहल
उज्जर कुरतावला सभ सँ आगू
ओक्कर चालि चलब झपटमार जेंका.



अक्टूबर 02, 2012

पंडा आ दलाल (हास्य कविता)

पंडा आ दलाल
(हास्य कविता)

एकटा गप साफे बुझहू त
ई दुनू ममिऔते पिसिऔते छि

एकटा अछि जं पंडा
त दोसर अछि दलाल.

साहित्यों आब एकरा दुनू सँ
अछूत नहि रहि गेल
पंडा बैसल अछि पटना में
त दिल्ली में बैसल अछि दलाल.

सभटा साहितिय्क आयोजन में
रहबे करत एककर सझिया-साझ
हँ ओ में छि नहियों में छि
सभटा लकरपेंच लगाबै तिकडमबाज.

की दरभंगा आ की कलकत्ता?
सभ ठाम बैसल अछि तिकडमबाज
अपना-अपना ओझरी में ओझरौत
आ सुढ़िये नहि देत कोनो काज.

पहिने ई काज हमही शुरू केलौहं
बड़-बड़ बाजै भाषाई पंडा
धू जी एककर श्रेय त हमरा
ताहि दुआरे अपस्यांत भेल दलाल.

खेमेबाजी आ गुटबाजी केलक
सत्य बजनिहार के धमकी देलक
अपना स्वार्थ दुआरे ई सभ
भाषा साहित्यक सर्वनाश करेलक.

अपने मने बड्ड नीक लगइए
मुदा आई "कारीगर" किछु बाजत
कहू औ पंडा आ दलाल
एहेन साहित्य समाज लेल कोन काजक?

साहित्य समाज जाए भांड में
एकटा दुनू के कोन काज
साहित्यक ठेकेदारी शुरू केलक
ई दुनूटा भ गेल मालामाल.

सितंबर 23, 2012

फुसियाँहिक झगड़ा (हास्य कविता)

फुसियाँहिक झगड़ा

(हास्य कविता)

जतैए देखू ततैए देखब झगड़ा


बेमतलबो के होइए रगरम-रगड़ा

जातिवाद त कियो क्षेत्रवाद के नाम पर

लोक करै फुसियाँहिक झगड़ा।



चुनावी पिपही बजैते मातर

की गाम घर, आ की शहर-बज़ार

एहि सँ किछु होना ने जोना

मुदा लोक करै फुसियाँहिक झगड़ा।



फरिछा लेब, हम ई त तूं ओ

हम एहि ठामहक तूं ओई ठामहक

एक्के देशवासी रहितहु हाई रे मनुक्ख

लोक करे फुसियाँहिक झगड़ा।



अपने देश मे एक प्रांतक लोक

दोसर प्रांतक लोक के घुसपैठी कहि

खूम राजनीतिक वाहवाही लूटैए

दंगा-फसाद, आ कि-की ने करैए।



नेता सबहक करनामा देखू

ओ करैथ वोट बैंक पॉलिसी के नखरा

हुनके उकसेला पर भेल धमगिज्जर

आ लोक केलक फुसियाँहिक झगड़ा।



लोक भेल अछि अगिया बेताल

नेता नाचए अपने ताल

कछमछि धेलक चुप किएक बैसब

आऊ-आऊ बझहाउ कोनो झगड़ा।



जातिवाद के नाम पर वोट बटोरू

दंगा-फसादक मौका जुनि छोड़ू

अपना स्वार्थ दुआरे भेल छी हरान

क्षेत्रवादक आगि पर अहाँ अप्पन रोटी सेकू।



की बाबरी आ की गोधरा कांड

बेमतलब के भेल नरसंहार

कतेक मरि गेल, कतेको खबरि नहि

मुदा एखनो बझहल अछि सियासी झगड़ा।



देश समाज जाए भांड़ मे

नेता जी के कोन छनि बेगरता

जनता के बेकूफ बनाउ

हो हल्ला आ कराऊ कोनो झगड़ा।





सितंबर 01, 2012

फोंफ काटि रहल सरकार (हास्य कविता)

फोंफ काटि रहल सरकार
              (हास्य कविता)
रंग विरंगक डिग्री डिप्लोमा लेने
रोड पर घूमि रहल युवक बेकार
देशक कर्ता-धर्ता चुप्पी लधने छथि
आ फोंफ काटि रहल सरकार।
 
बुनियादी शिक्षाक दरस एक्को मिसिया ने
खाली किताबी ज्ञान देल गेल छैक
आ परीक्षा पास कए डिग्री लेने
घूमि रहल अछि युवक बेरोजगार।
 
ओकरा नहि कोनो लुड़ि-भास
तोतारंटत आ परीक्षा पास
बेबहारिक जिनगी मे फेल भ गेल
कियो भूखले मरै अहाँ के कोन काज।
 
परीक्षा प्रणाली आ पाठ्यक्रम एहेन किएक
अहिं फरिछा के कहू औ सरकार
फुसियाँहिक डिग्री डिप्लोपा कोन काजक
कतेक लोक एखनो अछि बेकार।
 
कुर्सी पर बैसल छी त कोना बुझहब
कि होइत छैक लाचारी आ बेकारी
रोजगारक अवसर बंद केलियै
कतेक बढ़ि गेल अछि बेरोजगारी।
 
अहिंक पैरवी पैगाम सँ
अलूइड़ लोक सभ के नोकरी भेट गेल
मुदा मेहनत क पढ़निहार सभ
पक्षपात नीति दुआरे बेकार भ गेल।
 
दू टा पद दू लाख आवेदन कर्ता
एकटा पद मंत्री कोटा सँ
विज्ञापन पूर्व फिक्स भेल अछि
बिधपुरौआ परीक्षा टा करौताह।
 
मेहनत क ईमानदारी सँ
लिखित परीक्षा पास क लेब
मुदा इंटरव्यू मे अहाँ के
तेरह डिबिया तेल जरतौह।
 
ईमानदारी पर अड़ल रहब कारीगर
त इंटरव्यू मे कैंची चलत
योग्यता रहैतो अहाँ भ जाएब बेकार
मुदा फोंफ काटि रहल सरकार।।                

अगस्त 27, 2012

घोंघाउज आ उपराउंज (हास्य कविता)

घोंघाउज आ उपराउंज

(हास्य कविता)



हम अहाँ के गरिअबैत छि

अहाँ हमरा गरिआउ

बेमतलब के करू उपराउंज

धक्कम-धुक्की करू खूम घोघाउंज.



कोने काजे कहाँ अछि

आब ताहि दुआरे त

आरोप-प्रत्यारोप मे ओझराएल रहू

मुक्कम-मुक्की क करू उपराउंज .



श्रेय लेबाक होड़ मचल अछि

अहाँ जूनि पछुआउ

कंट्रोवर्सी मे बनल रहू

फेसबुक पर करू खूम घोघाउंज.



मिथिला-मैथिल के नाम पर

अहाँ अप्पन रोटी सेकू

अपना-अपना चक्कर चालि मे

रंग-विरंगक गोटी फेकू.



अहाँ चक्कर चालि मे

लोक भन्ने ओझराएल अछि

अहाँ फेसबूकिया ग्रुप बनाऊ

अपनों ओझराएल रहू हमरो ओझराऊ.



ई काज हमही शुरू केलौहं

नहि नहि एक्कर श्रे त हमरा अछि

धू जी ई त फेक आई.डी छि

अहाँ माफ़ी किएक नहि मंगैत छी?



बेमतलब के बड़-बड़ बजैत छी

त अहाँ मने की हम चुप्पे रहू?

हम की एक्को रति कम छी

फेसबुक फरिछाऊ मुक्कम-मुक्की करू.



आहि रे बा बड्ड बढियां काज

गारि परहू, लगाऊ कोनो भांज

कोनो स्थाई फरिछौठ नहि करू

सभ मिली करू उपराउंज आ घोंघाउज.

अगस्त 01, 2012

अहींटा एकटा नीक लोक छी . ( हास्य कविता)

 अहींटा एकटा नीक लोक छी .
                           हास्य कविता

"कारीगर" कतेक दिन बाद परीक्षा पास केलक
ओ त बड्ड बुडिबक अछि
अहाँ त बड्ड पहिने बड़का हाकिम बनि गेलौहं
ताहि द्वारे अहींटा एकटा नीक लोक छी .

अहाँक सफलताक  राज त
कहियो ने कियो कही सकैत अछि
अहाँ अपने लेल हरान रहैत छी
आ अहींटा एकटा नीक लोक छी .

सर समाज सँ कोनो मतलब नहि रखलौहं
परदेश मे दूमंजिला मकान बना लेलौहं
गाम घर सँ स्नेह रखनिहर कें
अपनेमने अहाँ बुडिबक बुझहैत छी .

अप्पन सभ्यता  संस्कृति अकछाह लगइए
ओकरा अहाँ बिसरै चाहैत छी
परदेश मे रंग-बिरंगक संस्कृति मे
अहाँ के नीक लगइए खूब मगन रहैत छी.

धियो-पूता के मातृभाषा नहि सिखबैत छि
ओकरा अंग्रेजी टा बजै लेल कहैत छी
मत्रिभाषक आंदोलन चलौनिहर बुडिबक
आ अहींटा एकटा नीक लोक छी.     

गाम घर पछुआएल अछि रहिए दिऔ
नहि कोनो माने मतलब राखू
अहाँ ए.सी. मे बैसल आराम करैत छि
अहींटा एकटा नीक लोक छी.

सर-समाज सँ स्नेह रखलौहं तहि द्वारे
हम बकलेल बुडिबक घोषित भेल छी
अहाँ रुपैया कम ढ़ेरी लगेलौहं
तहि द्वारे अहींटा एकटा नीक लोक छी.

खली रुपैया टा चिन्हैत छी
अहाँ बिधपुरौआ बेबहर करैत छी.
पाइए अहाँ लेल सभ किछु
आ अहीं टा एकटा नीक लोक छी.

कियो पहिने कियो बाद मे
मेहनत करनिहार त सफल हेबे करत
ओकरा अहाँ प्रोत्साहित कियक नहि करैत छी?
यौ सफलतम मनूख अहींटा एकटा नीक लोक छी
.


 

जुलाई 26, 2012

मुखिया जी देथहिन (हास्य कविता)

   मुखिया जी देथहिन 
                       (हास्य कविता)

बेमतलब के कोनो काज राज करैत छि
हम त कहब एक्को टा खरहो ने खोंटू
अहाँ हुनका वोट द दिऔन
सब किछु त मुखिया जी देथहिन.

जबनका के बिरधा पिलसिन
बुढ़बा सब के जबनका पिलसिन
व्यर्थ समय गमाऊ त बेकारी पिलसिन
सभटा पिलसिन त मुखिया जी देथहिन.

डिग्री डिप्लोमा नहि अछि तै सँ की ?
आब पढाई लिखाई एकदम नहि करू
हरदम हुनके संपर्क में रहू
शिक्षामित्र के नोकरी त मुखिया जी देथहिन.

सरकारी खरांत हाई रे पंचायती राज
आब रही नहि गेल कोनो काज राज
बिरधा पेसन पास कराऊ कामिसन खाऊ
रुप्पैयाक बंदरबांट त मुखिया जी करथिन.

ईंटाघर वाला के इंदिरा आवास
टूटलाहा घर वाला के लागल तरास
भुखले मरी जायब त बी. प. एल.
अन्तोदय योजना में फेल भेलौहं की पास ?

अप्पन काज राज छोडि के
ब्लोकक चक्कर लगाऊ
मुखिया जी त भेंट भए जेताह
चाहो पान के खर्च त उहे देथहिन.

कमाए खटाए के अहाँ करब की ?
फुसियाँहिक हर कियक जोतब
बँटा रहल अछि सरकारी खरांत
अहाँ दौगल जाउ बाद में हमरा नहि टोकब.

मंगनी के चाउर दाइल सँ पेट भरी जायत
कहियो भुखले नहि अहाँ मरब
कोई ने अहाँ के टोके मुखिया जी ओ.के.
मुखीये जी के कहल टा अहाँ करब.

राहत पैकेज के हेरा फेरी केलन्हि
आब आंखि हुनकर चोन्हरेलैंह
सरकारी लिस्ट में अहींक नाम टा अछि
ओई पर साइन त मुखिया जी कर्थिहीन.

लेखक- किशन कारीगर

जून 19, 2012

पद के दुरूपयोग (हास्य कविता)

पद के दुरूपयोग
(हास्य कविता)

फेर भेटत नहि एहेन सुयोग
अपना स्वार्थ द्वारे कानून बनाऊ-तोरू
मनमर्जी सँ करू ओकर उपयोग
अहाँ करू अपना पद के दुरूपयोग

सत्ताक कुर्सी पर बैसल छि अहाँ
कोनो समस्या देखैत छि कहाँ
मोन मोताबिक सी.बी.आइ के करू उपयोग
अहाँ करू अपना पद के दुरूपयोग !

अरब-खरब घोटाला करू मुदा
दाँत चिआरैत तिहर जेल सँ निकलू
फेर मंत्री पद हथिआउ आ घोटाला करू
सरकारी खजाना सुडाह क बैसू !

सत्ता कुर्सी आ सरकारी धन
जन्मजात अहाँक बपौती छि
अहाँ करू एककर खूब उपयोग
करू अपना पद के दुरूपयोग

मूलभूत समस्याक समाधान किएक करब ?
एही सँ किछु ने होयत ताहि दुआरे
एहने योजना बनाऊ जाही सँ
अहाँ अप्पन जेबी टा भरब

करू अन्याय मुदा बर्दी चमकाऊ
अपनों घुस खाऊ नेताजी के सेहो खुआउ
डरे कियो किछु बाजत कोना
दमनकारी नीति अहाँ अपनाऊ

न्यायक कुर्सी बिका गेल
देशक रक्षक बनी गेल भक्षक
कागजी पन्ना पर आर्थिक योजना
आम आदमीक कष्ट बुजहब कोना

मंत्री छि लालाबती गाड़ी में घूमूं
जनताक खोज खबरि एकदम नहि करू
एक्के बेर आब अगिला इलेक्शन में
भोंट दुआरे जनता के मुहं देखू

दंगा फसाद अहींक इशारा पर
पहिने सँ फिक्स भेल अछि
वोट बैंक पोलिसी के करू उपयोग
अहाँ करू अपना पद के दुरूपयोग !!

लेखक :- किशन कारीगर