copyright

एही ब्लॉग पर प्रकाशित सभटा आलेख लेखक- किशन कारीगर केँ अधीन सर्वाधिकार सुरक्षित | कॉपीराईट अधिनियम के तहत लेखकsक लिखित अनुमति के बिना आलेखsक कोनो अंशक मिमियोग्राफ, छाया प्रति ,रिकार्डिंग ,पुनः मुद्रण नहि कएल जा सकैत अछि E-mail - kishan.tvnews@gmail.com| MO - 09990065181 (All artical of This blogs is all right reserved to writer Kishan Karigar according indian copy right act.)

फ़रवरी 14, 2011

किरीम लगाउ-मुहॅ चमकाउ



  किरीम लगाउ-मुहॅ चमकाउ

                 ।एकटा हास्य कथा।

बाबूबरही बज़ार सॅ घूमी क अबैत रही जहॉ सतघारा टपलहूॅ की मुक्तेश्वर स्थान लग बाबा भेंट भए गेलाह। हुनका देखैते मातर हम प्रणाम कहलियैन की बाबा बजलाह आबह बच्चा तोरे बाट ताकि रहल छलहूॅ जे कहिया भेंट हेबअ कतेक दिन बाद एमहर माथे एलह कहअ केमहर सॅ ख़बर नेने आबि रहल छह। हम बजलहूॅ बाबा हम त बरही हाट सॅ तीमन तरकारी किनने आबि रहल छी।
                 बाबा हरबड़ाईत बजलाह हौ बच्चा हमरो एगो मुहॅ चमकौआ किरीम देए ने ।हम पुछलियैन बाबा ई कहू जे मुहॅ चमकौआ किरीम केहेन होइत छैक। बाबा खिसियाअैत बजलाह कह त तोंही मीडियावला सभ प्राइम टाइम मे हल्ला कए लोक के कहैत छहक जे मरद भए के माउगीवला किरीम यदि हमरा जॅका गोर बनना है त ईमामी हैण्डसम मरदवला किरीम सिरीफ साते दिन मे दोगुना गोरापन। अहि दुआरे भेल जे हमहॅू कनि गोर-नार भए जाइत छी। हम बजलहूॅ बाबा अहॉ कथि लेल एहि किरीम सबहक फेरा मे परैत छी अहॉ त केहेन बढ़ियॉ सौंसे देह बिभूत लेप के अपने मगन मे रहैत छी। हमहूॅ तए अहिं जॅका साधुए छी हमरा लग मुहॅचमकौआ किरीम नहि अछि। ई सुनि बाबा तामसे अघोर भेल बजलाह तहॅू फूसि बजैत छह देखेत छहक मीडियावला लक तए रंग बिरंगक किरीम रहैत छैक तहूॅ मंगनी मे मदैद नहि करबह त हयिए ले 5रूपया आ लाबह मुहॅचमकौआ किरीम।
हम असमंजस मे परि गेलहॅू जे बाबा सन औधरदानी लोक के किरीमक कोन काज से कनेक फरिछा के पूछि लैति छियैन जे की भेल। हम पुछलियैन त बाबा बजलाह हौ बच्चा तोरा सभटा गप की कहियअ। बड्ड सख सॅ चारि बरिख बाद बसहा पर बैसि हम अपन सासुर हरीपुर गेल रही। गौरी दाए त बियाहे दिन सॅ हमर ठोर मुहॅं देखि रूसल छलीह। हम सोचलहॅू जे आई हुनकर सखी सहेली माने हम अपन सारि सभ सॅ हॅसी मज़ाक कए मोन मे संतोख कए लैति छी। हम अपना सारि सॅ पूछलहू कहू कुशल समाचार कि हमर सारि उपकैरि के बजलीह बुरहबा बर बड्ड अनचिनहार बुरहारी मे लगलैन किरीमक बोखार आ सभ गोटे भभा भभा के खूम हॅसैए लगलीह। हम पूछलियैन जे साफ साफ कहू ने की कहि रहल छी कि हमर दोसर सारि आर जोर सॅ हॉ हॉ के हॅसैत बजलीह अईं यौ पाहुन बुरहारी मे सासुर अएलहॅू त अकील रस्ते मे हेरा गेल की\ हम बजलहू से की त एतबाक मे हमर छोटकी सारि मुहॅ चमकबैत बजलीह देखैत छियैक हाट बज़ार मे रंग बिरंगक किरीम पाउण्डस बोरो प्लस डोभ एसनो पाउडर फेरेन लबली बिकायत छै से सब लगा के मुहॅ उजर धब धब बना लेब से नहि। एहेन कारि झोरी मुहॅ पर त घसबैहनियो ने पूछत आ हम तए एम.बी.ए केने छी। जाउ थुथून चमकौने आउ तब हॅसी मज़ाक करब।
    आब तोंही कहअ जे बिना किरीम लगौनेह जान बॉचत। देखैत छहक नएका नएका छौंड़ा सभ सासुर जाइअ सॅ पहिने ब्यूटी पार्लर जा थूथून चमकबैत अछि। हौ बच्चा कि कहियअ एखुनका छौंड़ीयो सभ कम ने अछि देखैत छहक किरीम  लगबैत लगबैत मुहॅ मे फाउंसरी भए जाइत छैक मुदा थुथून चमकबै दुआरे इहो मंजूर। पछिला पूर्णिमा मेला देखबाक लेल छहरे-छहरे पिपराघाट मेला गेल रही त ओतए गौरी दाए के दू चारि टा बहिना सभ भेंट भए गेलीह हम पूछलियैन जे कहू मुहॅ मे एतेक फाउंसरी केना? कि ताबैत हमर साउस केमहरो सॅ बजलीह पाहुन हिनका सभटा गप कि कहियैन ई सभ किरीम लगेबाक फल। ई छाउंड़ी सभ फिलमी हिरोईन सॅ एक्को पाई कम नहि अछि बिना ब्यूटि पार्लर जेने एकरा सभ के अनो पानि नहि नीक लगैत छैक। ई सुनि हमरो भेल जे ब्यूटी पार्लर जा कनेक थुथून चमका लैति छी। मुदा हम जे ब्यूटि पार्लर जाएब से जेबी मे एक्कोटा पाइओ नहि अछि। भागेसर पंडा के कतेको दिन कहलियैअ जे हमरो ब्यूटि पार्लर नेने चलअ से ओकरो भरि भरि दिन फूंसियाहिक पूजा-पाठ सॅ छुट्टी ने।
  हम बजलहॅू त बाबा दिल्ली चलू ने ओतए त बड्ड नीक एक पर एक ब्यूटि पार्लर छै। बाबा बजलाह हौ बच्चा हम डिल्ली नहिं जाएब हौ कियो नमरो पता नहि बता दैत छैक एक सॅ एक ठग लोक सभ रस्ते पेरे भेटतह हमरा त डर होइए। त बाबा चलू ने फिलिम सिटी नोएडा ओहि ठाम फेसियल करा लेब। बाबा बजलाह नहि हौ बच्चा बुरहारी मे एहेन करम नहि करब जे कोनो न्यूज़ चैनल जाएब। तोरो मीडियावला के सेहो कोनो ठीक नहि छह बेमतलबो गप के ब्रेकींग न्यूज़ बना दैति छहक। हम एमहर ब्यूटि पार्लर आ कोन ठिक तों खटाक दिस चैनल पर चला देबहक ब्रेकींग न्यूज़ किरीम लगाउ-मुहॅ चमकाउ।


 लेखक:- किशन कारीग़र
              
                                   
परिचय:- जन्म- 19830(कलकता में) मूल नाम-कृष्ण कुमार रायकिशन। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दू माताक नाम-श्रीमती अनुपमा देबी।मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी, जिला-मधुबनी (बिहार)। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम. फिल(पत्रकारिता) एवं बी. एड कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।


फ़रवरी 12, 2011

गलचोटका बर - किशन कारीगर

             
          गलचोटका बर।

                    ¼एकटा हास्य कविता)

देखू-देखू हे दाए-माए
केहेन सुनर छथि गलचोटका बर।
तिलकक रूपैया छनि जे बॉंकि
सासुर मे खाए नहि रहल छथि एक्को कर।

अनेरे अपसियॉंत रहैत छथि
अल्लूक तरूआ छनि हुनका गारा में अटकल।
खाइत छथि एक सेर तीन पसेरी
मुदा देह सुखाएल छनि सनठी जॅंका छथि सटकल।

केने छथि पत्रकारिताक लिखाई-पढ़ाई
दहेजक मोह मे छथि भटकल।
ऑंखि पर लागल  छनि बड़का-बड़का चश्मा
मुहॅं कान निक तऽ चैन छनि आधा उरल।

ओ पढ़हल छथि तऽ खूम बड़ाई करू ने
मुदा हमरा पढ़नाईक कोनो मोजर ने।
बाबू जी के कतेक कहलियैन जे हमरो पसीन देखू
मुदा डॉक्टर इंजीनियर जमाए करबाक मोह हुनका छूटल ने।

जेना डॉक्टर इंजीनियरे टा मनुख होइत छथि
लेखक समाजसेवीक एको पाई मोजर ने।
सोच-सोच के फर्क अछि मुदा केकरा समझाउ
दूल्हाक बज़ार अछि सजल खूम रूपैया लूटाउ ने।




एहि बज़ार में अपसियंॉत छथि लड़की के बाप
इंजीनियर जमाए कए छोड़ैत छथि अपन सामाजिक छाप।
एहि लेल तऽ अपसियॉंत छथि एतबाक तऽ ओ करताह
बेटीक निक जिनगी लेल ओ किछू नहि सोचताह।

अहॉं बेटी केॅ निक जॅंका राखब दहेज लैत काल
हमरा बाबू के ओ तऽ बड़का सपना देखौलनि।
ई तऽ बाद मे बूझना गेल जे किछूएक दिनक बाद
दहेजक रूपैया सॅं ओ पानक दोकान खोललैनि।

नहि यौ बाबू हम नहि पसिन करब एहेन सुनर बर
एतबाक सोचिए के हमरा लगैत अछि डर।
भले रहि जाएब हम कुमारी मुदा
कहियो ने पसिन करब, एहेन दहेज लोभी गलचोटका बर।

 लेखक:- किशन कारीग़र
              
                                   
परिचय:- जन्म- 19830(कलकता में) मूल नाम-कृष्ण कुमार रायकिशन। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दू माताक नाम-श्रीमती अनुपमा देबी।मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी, जिला-मधुबनी (बिहार)। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम. फिल(पत्रकारिता) एवं बी. एड कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।










































फ़रवरी 10, 2011

किडनी चोर -किशन कारीग़र

     किडनी चोर।

देखू-देखू केहेन जमाना आबि गेल
मनुखक हृदय भऽ गेल केहेन कठोर
सभ सॅं मुॅंह नुकौने, चुपेचाप
भागि रहल अछि एकटा किडनी चोर।

डॉक्टर भऽ के करैत अछि डकैति
कोनो ग़रीबक बेच लैत अछि किडनी
पुलिस तकैत अछि ओकरा इंडिया मे
मुदा ओ परा जाइत अछि सिडनी।

कोनो ग़रीबक किडनी बेचि कऽ
संपति अरजबाक केहेन ई अमानवीय भूख
केकरो मजबूरीक फायदा उठा कऽ
डॉक्टर तकैत अछि खाली अपने सूख।

केकरो जिनगी बॅंचौनिहार डॉक्टर रूपयाक लोभ में
बनि गेल आब किडनी चोर
छटपटा रहल अछि एकटा गरीबक करेजा
कनैत-कनैत सूखा गेलै ओकर ऑंखिक नोर।

मनुख आब केहेन लोभी भऽ गेल
आब ओ किडनी बेचब सेहो सीख गेल
राता-राति अमीर बनबाक सपना देखैत अछि
रूपया खातीर ओ किछू कऽ सकैत अछि।

मनुख भऽ के मनुखक घेंट काटब
कोन नगर में सिखलहुॅं अहॉं
आबो तऽ, बंद करू किडनी बेचबाक धंधा
मानवताक नाम सगरे घिनेलहुॅं अहॉं।

कोनो गरीबक किडनी बेचि कऽ
महल अटारी बनाएब उचित नहीं थीक
एहेन डॉक्टरीक पेशा सॅं कतहू
मजूरी बोनिहारी करब बड्ड नीक।

हम अहिं के कहैत छी यौ किडनी चोर
एक बेर अपने करेजा पर छूरी चला कऽ देखू
कतेक छटपटाइत छैक करेजा
एक बेर अपन किडनी बेचि कऽ तऽ देखू।

 लेखक:- किशन कारीग़र
               

परिचय:-जन्म- 19830 कलकता में मूल नाम-कृष्ण कुमार राय किशन। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दूमाताक नाम- श्रीमती अनुपमा देबी। मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी जिला-मधुबनी बिहार। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि।वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम फिल पत्रकारिता एवं बी एड कुरूक्षे़त्र  विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।

नबकनियाँ - किशन कारीगर


        नबकनियाँ

मोन रखियौ कनेक हमरो पिया
सोलहो सिंगार कए बैसल छी हम एसगर
भेंट होएब कहिया अहॉ मोन मे आस लगेने
अहॉक बाट तकैत छी हम एसगर।

कौआ कूचरल भोरे-भोर
चुपेचाप हमरा केलक सोर
कहलक जल्दीए औतहुन तोहर ओझा
लिपिस्टीक लगा हम रंगलहुॅ अपन ठोर।

परदेश जाइत-मातर यौ पिया
किएक बिसैर जाइत छी नबकनियॉ के
नहि बिसरब कहियो परदेश मे हमरा
सपत खाउ हमरा पैरक पैजनीयॉं के।

जूनि रूसू अहॉ सजनी नहि घबराउ यै
मोन पड़ैत छी अहॉ तऽ लगैत अछि बुकोर यै
मुदा कि करू नहि भेटल तनखा समय पर
नहि किनलहुॅ अहॉंक लेल लहंगा पटोर यै।

साड़ि पहिर हम गुजर कए लेब
नहि चाहि हमरा राजा लहंगा पटोर यौ
अहॉक सुख-दुख मे रहब सहभागी
देखितहुॅं अहॉ के ऑखि सॅ झहरैत अछि नोर यौ।

अहिंक बियोग मे दिन राति जरैत छी
इजोरिया मे टुकूर-टुकूर अहिं के देखैत छी
अहिंक संग एहि बेर घूमब चैतीक मेला
मोने मोन हम एतबाक नियार करैत छी।

बड्ड केलहुॅं नियार अहॉ आबि कऽ देखू
मुस्की माइर रहल छी हम चौअनियॉं
जल्दी चलि आउ गाम यौ पिया
चिªट्ठी लिख रहल अछि एकटा नबकनियॉं।


 लेखक:- किशन कारीग़र
              
                                   
परिचय:-जन्म- 19830 कलकता में मूल नाम-कृष्ण कुमार राय किशन। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दूमाताक नाम- श्रीमती अनुपमा देबी। मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी जिला-मधुबनी बिहार। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम फिल पत्रकारिता एवं बी एड कुरूक्षे़त्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।






पिअक्कर- किशन कारीगर

          
पिअक्कर।

सॉझ पड़ैत देरी पीब कऽ ओंघरा जाइत छी
हम छी पीअक्कर।
पढ़लाहा लिखलाहा के मूर्ख बूझैत
अपना के बुझैत छी लाल बुझऽक्कर।
धिया.पूता पढ़ैत अछि किनैंहि
तेकर नैंहि करैत छी हम खोज
मुदा पिबैत छी हम रोज।
अपन काज छोड़ि कैं
व्यर्थ हम घूमैत रहैत छी
केहेन छी हम घूमक्कर हम छी पीअक्कर।
पाई सधहेलौं दारू में
भऽ गेलौंह हम फक्कर
महाजनक कर्ज देखि कऽ
अबैत अछि हमरा चक्कर।
लाधहल अछि हमरा माथ पर कर्जाक पहाड़
लगबैत छी कोर्ट कचहरीक चक्कर
किएक तऽ हम छी पिअक्कर।
सॉझ पड़ैत देरी पीब कऽ ओंघरा जाइत छी
हम छी पीअक्कर।
एखने हम शपत खाईत छी
 जे हम नैंहि आब पीयब
किएक कहत आब कियो हमरा पिअक्कर।
धिया.पूता के निक स्कूल कॉलेज में पढ़ाएब
एहि लेल तऽ एलगबैत छी मधुबनी दरभंगाक चक्कर।


लेखक:- किशन कारीग़र

 
परिचय:- जन्म- 19830 कलकता में मूल नाम-कृष्ण कुमार राय किशन। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दू माताक नाम- श्रीमती अनुपमा देबी।   मूल निवासी-ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी] जिला-मधुबनी बिहार। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र  के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक, आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं लघु कथा कविता राजनीतिक  लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी।शिक्षाः-एम फिल पत्रकारिता एवं बी एड कुरूक्षे़त्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।






       
         






हमरो जीबऽ दिअ- किशन कारीग़र




हमरो जीबऽ दिअ



कोइखे मे छटपटा रहल छी हम

ई दुनियॉं हमरो देखऽ दिअ

बेटी भऽ के जनम लेनहि कोनो अपराध नही

बाबू यौ, ई जिनगी हमरो जिबऽ दिअ।



डाक्टरक आला कहि रहल अछि

नहि बचतहु आब तोहर प्राण

अल्ट्रªासाउण्डक रिपोट, किछूएक काल मे

आब लए लेतहु तोहर जान।



करेलहुॅं अल्ट्रªासाउण्ड यौ बाबू

मुहॅ भेल अहॉक मलीन

डाक्टर संगे केलहुॅ ई प्लान

कोइखे में एहि बेटी के, कए दिहक क्लीन।



हम बूझैत छी, हमरा जनमलाक बाद

नहि बॉंटब अहॉं जिलेबी बुनियॉं

दुखित भेल अछि मोन अहॉक, नहि आनब

हमरा माए लेल, नाक केर नथुनियॉं।



जॅ होइतहॅंू हम बेटा

करितहुॅं अहॉ सगरे अनघोल

अरोसी-पड़ोसी शुभकामना दितैथि

रसगुल्ला बॅटितहुॅ अहॉ टोले-टोल।



बेटीक जनम भेला पर,एहेन बेईमानी किएक?

आई किछू हमरो कहऽ दिअ

बेटी भऽ के जनम लेनहि कोनो अपराध नहि

बाबू यौ, ई जिनगी हमरो जिबऽ दिअ।



ई कविता विदेह में प्रकाशित भेल अछि।







लेखक:- किशन कारीग़र






परिचय:-जन्म- 1983ई0 कलकता में मूल नाम-कृष्ण कुमार राय किशन’। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दू’माताक नाम- श्रीमती अनुपमा देबी। मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी जिला-मधुबनी बिहार। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम फिल पत्रकारिता एवं बी एड कुरूक्षे़त्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।







फ़रवरी 09, 2011

आब मानि जाऊ ने

आब मानि जाउ ने।

(एकटा हास्य रेडियो नाटक)

परिचय पात:-

1 राजेश - नायक।
2 कमला - नायिका-राजेशक पत्नी उर्फ पाही वाली।
3 मनोहर - राजेशक लंगोटिया दोस्त।
4 विमला - मनोहरक पत्नी उर्फ ठारही वाली।
5 नीलू - विमलाक सहेली।
6 सोनी - नीलूक सहेली।
7 मदन - दोस्त ।

पटकथा लेखक:- किशन कारीग़र।

संपर्क सूत्र:- 011-32670787




नोट:-भारतीय कॉपीराइट अधिनियम के तहत सर्वाधिकार लेखक कें अधिन सुरक्षित। लेखकक लिखित अनुमतिक बिना नाटकक कोनो अंशक प्रसारण व प्रकाशन नहि केल जा सकैत अछि।


। प्रथम दृश्य।

ध्वनी संगीत

कमलाः- (कनेक तमसाएल भाव में) मारे मुहॅ धकेए आब बाट तकैत-तकैत मोन अकछा गेल। हिनका किछू अनबाक लेल नहिं कहलियैन कि एकटा आफद मोल लए लेलहॅू।

तखने राजेशक प्रवेश।
राजेश:- (दारूक निशा में बरबराइत) हे यै पाही वाली कतए छी यै एम्हर आउ ने यै पाही वाली।

कमला:- (खूम खिसियाएल भाव मे) लगैत अछि जेना पूरा अन्धरा बजारे खरीदने आबि रहल छथि। तहि द्वारे अन्हराएल छथि।

राजेशः- हे यै पाही वाली अहॉ जूनी खिसियाउ एकबेर हमर गप सुनू ने।

कमलाः- हम कि खाक सुनू अहॉ के तए हमर कोनो फिकिरे नहि रहैए।

राजेशः-( निशा में मातल गबैत अछि) भिजल ठोर अहॉके।

कमलाः- हे दैब रै दैब अहॉक एहेन अवस्था देखि तए हमर ठोर मुहॅ सुखा गेल आ अहॅा कहैत छी जे भिजल अछि।

राजेशः- अहॉ फुसियाहीं के खंउजा रहल छी गीत सुनू ने। प्यासल दिल ल..ल हमर।

कमलाः-( खउंजा के) हे भगवान एतेक पीबलाक बादो अहॉके पियास लगले अछि तए हैए लिअ घैला मेहक ठंढ़ा पानि।

राजेशः- (हॅंसैत बरबराएत अछि) अहॅू कमाले कए रहल छी पहिने गीत सुनि लियए ने।
राजेशः- कियो हमरा संगे भिंसर तक रहतै तकरा हम करबै खूम प्यार ओ...हो...ओ हो...हो...ओ..हो...हो।

कमलाः- आब कि खाक प्यार करब । आब एक पहर बाद भिंसरो भए जेतैए।

राजेशः- (गीत गबैत गबैत सूतबाक प्रयास) आ सिटी बजा रहल अछि।
कमला:- हे महादेव एहेन गबैया के नींद दए दिऔय।
राजेशः- आब हयिए हम नानी गाम गेलहॅू आ अहॉ अपना गाम सॅ जलखै नेने आउ।

कमला:- अच्छा आब बूझनूक बच्चा जेंका चुपेचाप कले-बले सूति रहू ने।
राजेश:- ठीक छै पाही वाली जॅं अहॉं कहैत छी तऽ हम सूति रहैत छी मुदा जलखै बेर मे हमरा उठा देब।

राजेश सूति रहैत अछि।

।दृश्य समाप्त।

दृश्य-2 प्रारंभ।

चिड़ैय चुनमून के चूं...चूं कें ध्वनी

कमला:- (राजेश के उठबैत) हे यै आब उठि जाउ ने भिंसर भए गेलैए।
राजेश:- पाही वाली अहॉं ठीके कहैत छी की?

कमला:- ठीके नहिं तऽ की झूठ कनेक अपने ऑंखि सॅ देखू भिंसर भऽ गेलै।
राजेशः- हॅं यै ठीके मे भिंसर भऽ गेलैए अच्छा तऽ आब हम मॉर्निंग वॉक माने घूमि फिरी कऽ अबैत छी।

कमला:- अच्छा ठीक छै त जाउ मुदा जल्दीए घूमी क चली आएब। ताबैत हम चाह बना के रखने रहैत छी।

राजेशः- बेस तऽ आब हम घूमने अबैत छी। ओ के बाई-बाई।

राजेशक घर सॅं प्रस्थान।


पार्क में बातचीत करबाक ध्वनी प्रभाव।

मनोहर:- (दौगि रहल अछि आ हॉफि लैत) भाई आई काल्हि राजेश लंगोटिया देखबा मे नहि आबि रहल अछि।

मदन:- (खैनी चुनेबाक पटपट) से तऽ ठीके मे भाई हमरा तऽ बूझना जाइए जे ओ तऽ सासुर मे मंगनीक तरूआ तोड़ी रहल अछि।

मनोहर:- से जे करैत हुए मुदा भेंट तऽ करबाक चाहि।
मदन:- (हरबड़ाइत) हई ए ए ई लियअ नाम लैत देरी राजेश सेहो आबिए गेल।

दौगल अबैत राजेशक प्रवेश।
मनोहर:- (राजेश के देखैत) ओई-होई हमर दोस कि हाल चाल छौ।
राजेशः- हम तऽ ठीके छी भाई तू अपन कह कि समाचार।

मदन:- राम राम यौ लंगोटिया भाई।
राजेशः- (हॅसैत) आहा हा हा राम राम यौ चिकनौटिया भाई।

मदन:- राजेशक हाल तऽ हमरा सॅं पूछू बेचारा चिंता सॅं सनठी जेंकॉं सूखा गेल।
राजेश:- कि भेलैए एकरा से कहब ने कोनो दुख तकलीफ आफद विपैत।

मदन:- (राजेश स)ॅ हमरा सॅ त निक जे राजेश भाई अपने कहिए दहक तखन इहो बकलेल छौड़ा बूझिए जेतैए।

मनोहर:-( उदास भऽ कें) भाई कि कहियौअ जहिया सॅ ठारही वाली रूसि कें अपना नैहर चैल गेलैए हमरा तऽ एक्को कनमा निक्के नहि लगैत अछि।

राजेश:- किएक तूं भाउजि के मनेलही नहि?
मनोहर:- हं रौ भाई कतबो मनेलियैए मुदा ओ नहि मानलकै।

राजेशः- से किएक एहेन कि भऽ गेलैए जे भाउजी मुहॅ फूलौने ठारही चलि गेलौह।
मनोहरः- हमरा दारू पीबाक हिसक छल एहि द्वारे हमर ठारही वाली सपत देलक मुदा हमर हिसक छूटल ने।

राजेशः-( किछू सोचैत) हमरो पाही वाली हमरा सॅ रूसल रहैत अछि किएक तऽ ओकर फरमाईश जे पूरा नहि केलियै।
मदनः- (खैनी चूनेबाक पटपट अवाज) हें हें हा हा हम तऽ कहैत छी दूनू गोटे अपना-अपना कनियॉ ंके मना लियअ आ झगरे खतम।

मनोहरः- अहॉ ठीके कहलहूॅं मदन भाई। आब हम अपना ठारही वाली के मनाएब।
मदन:- हर हर महादेव तऽ झट सॅं निकालू हमर सवा रूपैया दक्षिणा।

मनोहरः- ओकरा सामने सपत खाएब जे आब हम दारू के मुहॅं नहि लगाएब।
राजेशः- तऽ देरि किएक? चल ने ठारही वाली भाउजी के मनेबाक लेल अंधराठारही चलैत छी।
मनोहरः- ठीके रौ भाई चल। मुदा जाइ सॅ पहिने तूं अपना पाही वाली के फोन कऽ दहि ने।
राजेश:- तूं ठीके कहि रहल छें हम एखने फोन लगबैत छी।

मोबाइल सॅं फोन लगेबाक ध्वनी प्रभाव
स्वर:- महिलाक अवाज़ हेल्लो ।
राजेश:- हम आई घर नहिं आएब। किएक तऽ हम मनोहर संगे ओकर सासुर जा रहल छी।
स्वरः- अहॉं के तऽ एक्को रति हमर फरमाईश मोन नहि रहैए।
राजेशः- पाहि वाली अहॉ जूनि रूसि हम अहॉ लेल किछू ने किछू नेने आएब।
स्वर:-ठीक छै तऽ जाउ मुदा जल्दीए चलि आएब। बाई- बाई।
राजेशः- बेस त बाई-बाई।
फोन कटबाक ध्वनी।

राजेशः- पाही वाली तऽ मानि गेलैए चल आब ठारही वाली के मनबैत छी।
मनोहरः- हॉफैत हं हॅं हं किएक नहि? जल्दी दौगल चल।
मदनः- भ भ भाई हमर द द दक्षिणा।
हॅसैत हॅसैत मनोहर आ राजेशक प्रस्थान।

मदन:- (हॅसि क) ई दूनू गोटे त सासुर चलि गेल त आब हमहू जाइत छी बाबूबरही अपना पंडिताइन के भेंट कए आबि। हें हें हें।

दृश्य -3

लड़की के जोर सॅं हॅसबाक अवाज़
(नीलू आ सोनी दूनू गोटे गीत गाबि हॅसी मजाक करै मे लागल अछि)

नीलूः- गीत गबैत आबि जाउ एके बेर आबि जाउ।
सोनीः- केकरा बजा रहल छीहि गे आ आ आबि जाउ।
नीलू-( मुस्कि मारैत) केकरो नहि तोरा ओझा के।
सोनी:-(गीत गबैत) तऽ कहि ने सोझहा आबि जाउ एक बेर आबि जाउ।

ताबैत मनोहर आ राजेशक प्रवेश।
नीलूः- दूनू गोटे के देखी क) दूल्हा बाबू आबि जाउ एक बेर आबि जाउ।
मनोहर:- अहॉ बजेलहूूॅं आ हम हाजिर। कहू समाचार।

सोनीः- ठीके मे गै बहिना देखही गे एहेन धरफड़िया दूल्हा देखल ने।
नीलूः- प्रणाम यौ पाहुन। रस्ता मे कोनो दिक्कस तऽ नहि भेल ने?

मनोहरः- दिक्कस कि खरंजा आ टूटलाहा पिच पर साइकिल चलबैत काल हार पांजर एक भऽ गेल।
सोनी:- त आब मजा आबि रहल अछि।
राजेशः- मजा तऽ आबि रहल अछि मुदा हमरा भाउजी सॅं भेट करा दितहॅू तए ठीक्के मे मजा आबि जेतैए।

नीलू:- अहॉं के नहिं चिन्हलहूॅं यौ हरबड़िया पाहुन।
राजेशः- हॅंसि क हा हा हा हमरा नहि चिन्हलहूॅ हम अहॉ पाहुनक लंगोटिया दोस राजेश छी।

(सभ गोटे ठहक्का लगबैत)
सोनीः- अहॉं कतेक नीक बजैत छी। चलू ने घूमैए लेल।
नीलूः- हॅ यौ पाहुन चलू चलू गाछी कलम आ खेत पथार सभ देखने अबैत छी।
राजेशः- हॅं हॅं किएक नहि चलू ने तीनू गोटे घूमने अबैत छी।

ठहक्का लगबैत तीनू गोटेक प्रस्थान।

मनोहर:- वाह रे किस्मत। सासुर हमर मुदा मान-दान एक्कर। हाई रे किस्मत के खेल।
तखन गीत गबैत विमलाक प्रवेश।

(गीतक ध्वनी- पिया परदेश सॅ पजेब नेने एब यौ पिया)
विमलाः- आश्चर्य भाव सॅं अ अ अहॉं।
मनोहरः- हॅ अहॉ बजेलहूॅ आ हम हाजिर छी। कहू कुशल समाचार।

विमलाः- (रूसि क बजैत) अहॉं के बजेलक के? जाउ हम अहॉ सॅ नहि बाजब।
मनोहरः- अहूॅं त कमाले करैत छी। देखू तऽ हम अहॉक लेल कि सभ अनने छी।
विमलाः- (आश्चर्य भाव सॅ) क क कि अनने छी हमरा लेले??

मनोहरः- (प्यार सॅ) ट...ट...ट टॉफी।
विमला:- अहॉ के टॉफी छोरी आरो किछू बजार मे नहि भेटल की?
मनोहरः- जिलेबी सिंहारा तऽ किनने छलहॅू अॅहिंक लेल मुदा रस्ते मे भूख लागि गेल तऽ अपने खा लेलहॅू।
विमलाः- (उदास भऽ के) अहॉं के तऽ एक्को रति हमर चिंते नहिं रहैयए।
मनोहरः- चिंता रहैयए तहि द्वारे तऽ आब हम दारू पिअब छोड़ि देलहूॅ।
विमलाः-( अकचका के) ठीके मे
मनोहरः- हॅं हॅं हम सपत खेने छी की आब हम दारू कहियो ने पिअब।
विमलाः- ई त बड्ड निक गप। आब हम किछू फरमाईश करी त?
मनोहरः- (हॅसैत) अहॉं फरमाईश त करू हम पूरा अंधरा बजारे घर उठौने चलि आएब।
तखने निलू सोनी आ राजेशक प्रवेश।
नीलू:- दीदी-दीदी चल ने आई पाहुन संगे बजार घूमने अबैत छी।
मनोहरः- हं हं चलू-चलू देरि भए जाएत आई अहॉं सभ कें अंधरा बजार घूमा दैत छी।

ठहक्का लगबैत सभहक प्रस्थान।



दृश्य-4

बजारक दृश्य बिक्रेता सभ के विभिन्न अवाज़।

बिक्रेताः- घड़ी लऽ लियअ, रेडियो लऽ लियअ।
बिक्रेता:- (डूगडूगी बजबैत) हे धिया पूता लेल डूगडूगी ल लियअ डूग-डूग।
राजेशः- भाई हमरा एकटा रेडियो किनबाक रहै।
बिक्रेताः- हईए लियअ ने एहि ठाम भेटत कम दाम मे निक रेडियो।
मनोहरः- लगैए तोहर दिमाग कतौह हरा गेलौ। घर मे टी वि छौ तइओ?

राजेशः-( अफसोस करैत) तोरा केना कहियौ की।
विमलाः- कहू तऽ सी. डि. टी. वि. के युग में कहू तऽ कियो आब रेडियो किनतैए।
राजेशः- (हॅसि क) इ हमरा पाही वाली के पसीन तऽ छियै तहि द्वारे त किनि रहल छियै।
मनोहर:- तखन तऽ एखने खरीद ले।
राजेशः- हे भाई एकटा बढ़िया क्वालिटी के रेडियो दिहअ।
बिक्रेताः- ई लियअ भाई साहेब।
राजेश:- हईए ई लियअ पाई। पाई देबाक ध्वनी प्रभाव।
मनोहर:- तऽ चल आब चलैत छी अपना गाम तोरा पाही वाली के मनेबाक लेल।
नीलूः- यौ पाहुन आ हम सभ।
राजेश:- अहॅू सभ चलू ने हमर गाम घर देखि क आपिस चलि आएब।
सोनीः- नहि यौ पाहुन पहिने हमरा सभ के घर तक छोडि दियअ। फेर कहियो अहॉ गाम मेला देखै लेल हम दूनू बहिन आएब।
मनोहरः- ठीक छै तऽ चलू अहॅा सभ कें गाम पर दए अबैत छी तकरा बाद हम सभ अपना गाम चल जाएब।
विमला:- ई भेल ने बुझनुक मनुक्ख वला गप।

ठहक्का लगबैत सभहक प्रस्थान।


दृश्य-5

रसोई घरक दृश्य। कमला गीत गुनगुना रहल अछि।

तखने राजेश मनोहर विमलाक प्रवेश।

राजेश:- सुनू ने सुनू ने सुन लियअ ने.हमर पाही वाली सुनू ..ने।
कमला:- हमरा अहॉक कोनो गप नहि सूनबाक अछि।
राजेशः- हे यै जूनि रूसू सुनू ने.....सुनू ने।
कमला:- कहलहूॅ तऽ नहि सूनैत छियैअ।
राजेशः- अहिं के सुनबाक लेल त बजार सॅं अनलहॅू। देख तऽ लियअ।
कमला:- (खिसियाअ के) हम कि कोनो अहॉं जंेका बहिर छी??

राजेश:- (अफसोस करैत) पाही वाली के हम केना बुझबई जे इ कोनो फरमाईश केने रहैए।
विमला आओर मनोहर एक दोसर सॅ कनफूसकीं कऽ गप करैत।
मनोहर - (विमला सॅं) लगैए कमला के किछू बूझहेबाक चाहि।
विमला - कमला बहिन एतेक खिसियाएल किएक छी। हमरा त कैह सकैत छी।
कमला - हिनका की कहियैन बहिन। पहिल सालगीरह के दिन हिनका सॅ किछू फरमाईश केने रहियैन मुदा हिनका तऽ कोनो धियाने नहिं रहैत छनि?

विमला - कहू तऽ एतबाक लेल एहेन खिसियाएब। पहिने देखियौ तऽ सही ओ अहां लेल कथी अनने छथि।
कमला - कथी इहे ने अंधरा बजारक मेथी।
विमला - नहि यै बहिन अहॉ एक बेर देखियौ त सही।
कमला - (आश्चर्य भाव सॅं) हे भगवान ठीके मे
कमला- राजेश सॅं हमरा लेल कथी अनने छी से देखाउ ने।
राजेश - हे भगवान आई अहॉ बचा लेलहॅू नहिं त...त आई फेर सॅ।
कमला - की भेल अहॉ के?
राजेश - (हरबराईत बजैत अछि) अहॉ बैग खोलि क क देखू ने हम कथि नेने एलहॅू अहॉ लेल स्पेशल मे।

बैग खोलबाक ध्वनी प्रभाव।
कमला- (हॅसि क) र...र....रेडियो। आब त हम मजा सॅं कांतिपूर एफ.एम जनकपूर एफ.एम. दरभंगा विविध भारती रेडियो सुनैत रहब।
राजेश- अहॉक मोन जे सुनबाक अछि से सुनैत रहू मुदा आब मानि जाउ ने।
कमला - (रूसि कें) रेडियो त अनलहॅू मुदा झुमका किएक नहि अनलहूॅं?
मनोहर- हे भगवान फेर सॅ एकटा नबका मुसिबत तूहिं बचबिहअ।

राजेश - हे यै पाही वाली हम अहॉं लेल बरेलीवला झूमका सेहो अनने छी। आब मानि जाउ ने।
सभ गोटे ठहक्का लगबैत। हॅसबाक ध्वनी प्रभाव।

मनोहर - वाह-भाई मानि गेलहॅू । रूसल कनियॉं कें मनाएब तऽ कियो राजेश सॅं सीखेए।
सभ गोटे एक संगे ठहक्का लगबैत हा...हा...।

।समाप्त।