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अप्रैल 01, 2014

संपादक स्वर्गवासी भ गेलाह


संपादक स्वर्गवासी भ गेलाह

अत्यंत प्रस्सान्तक संग सूचित क रहल छि जे आजुक शुभ दिन के शुभ मूहर्त में भिंसुरका पहर मिथिलांचल टुडे केर (सम्पादक) सोझहे सवर्गलोक पहुंच गेलाह. अतिथि संपादक अट्टहास करैत ई सूचना देलैन जे मृतक लेल एकटा मौन श्रद्धांजलि सभा केर आयोजन - (मावलंकर हॉल) दिल्ली में साँझुक पहर ५;५५ में  केएल जायत. इच्छुक व्यक्ति अपना बजट केर मोताबिक मधुर नेने अबश्य आबि.

                                                                              अपनेक स्वर्गवासी (संपादक)


अक्टूबर 06, 2013

पंडित रामाशीष पाठक के विनम्र श्रद्धांजलि


प्रसिद्ध पखावज वादक पंडित रामाशीष पाठक आब हमरा लोकनिक विच नहि रहला, हूनकर  निधन भ गेलइन। अमता घरनाक पंडित रामाशीष पाठक के विनम्र श्रद्धांजलि..अप्पन पखावज वादन लेल ओ प्रसिद्ध आ संगीत नाटक अकादेमी सहित कतेको पुरस्कार सं अलंकृत भेल छलाह..पंडित जी के निधन शास्त्रीय संगीत जगत लेल एकटा अपूर्णीय क्षति अछि...विनम्र श्रद्धांजलि ... 

फ़रवरी 08, 2013

मनुक्ख बनब कोना?


मनुक्ख बनब कोना?

छीः छीः धूर छीः आ छीः
मनुक्ख भ मनुक्ख सँ घृणा करैत छी
ओही परमेश्वर के बनाउल
माटिक मूरत हमहूँ छी अहूँ छी।

केकरो देह मे भिरला सँ
कियो छुबा ने जाइत अछि
आबो संकीर्ण सोच बदलू
ई गप अहाँ बुझहब कोना?

अहिं कहू के ब्राह्मण के सोल्हकन?
के मैथिल के सभ अमैथिल
सभ त मिथिलाक मैथिल छी
आबो सोच बदलू मनुक्ख बनब कोना?

अपना स्वार्थ दुआरे अहाँ
जाति-पाति के फेरी लगबैत छी
मुदा ई गप कहिया बुझहब
सभ त माँ मिथिले के संतान छी।

पाग दोपटा मोर-मुकुट
सभटा त एक्के रंग रूप छी
मिथिलाक लोक मैथिल संस्कार
एसकर केकरो बपौती नहि छी।

एकटा गप अहाँ करु धियान
सभ गोटे मिथिलाक संतान
जाति-पातिक रोग दूर भगाउ
सभ मिली कए लियअ गारा मिलान।

अपने मे झगरा-झांटी बखरा-बांटी
एहि सँ किछु भेटल नहि ने?
सोचब के फर्क अछि नहि कोनो जादू टोना
अहिं कहू आब मनुक्ख बनब कोना?

बेमतलब के गप पर यौ मैथिल
अहाँ एक दोसरा स’ झगरा करैत छी
माए जानकी दुखित भए कानि रहल छथि
ई गप किएक नहि अहाँ बुझहैत छी?

सामाजिक-आर्थिक विकास लेल काज करु
मिथिलाक माटि-पानि उन्नति करत कोना
केकरो स’ कोनो भेदभाव नहि करु
सप्पत खाउ अहाँ मनुक्ख बनब कोना?

जनवरी 12, 2013

डिनर डिप्लोमेसी (हास्य कविता)

डिनर डिप्लोमेसी

(हास्य कविता)



डिनर टेबल पर परोसल अछि

मटर पनीर आ शाही पनीर

छौंकल अछि घी देसी

आउ-आउ ई छी डिनर डिप्लोमेसी।



हम सतारूढ़ दल वला छी

आई सहयोगी दल वला लेल

डिनर माने भोज आयोजित भेल

हमरा समर्थन भेटल खूम बेसी।



आब बाहर सँ समर्थन देनिहार

बाकि रहि गेल छथि त

आई हुनके नामे राजनीतिक डिनर

ई छी डिनर डिप्लोमेसी।



अहाँ सभ जे खाएब

हम अहाँक फरमाईस पुराएब

मुदा एकटा गप कहि दि हम

बाहरि समर्थन के कहाबद्धि कराएब।



भरि पेट खाई जाई जाउ

अहाँ जे खाएब से हम खुआएब

मुदा ई कहू त चुपेचाप रहब

आ की मध्यावधि चुनाव करबाएब।



धू जी महराज अहूँ त

एकदम ताले करैत छी

खाइत-पीबैत काल ई गप नहि

पहिने दारू मँगाउ अहाँ बिदेशी।



डिनर टेबुल के नीचा मे देखू

बोतल राखल अछि देसी-बिदेशी

भरि छाक पीब लियअ

ई छी डिनर डिप्लोमेसी।



अच्छा ई कहू त सरकार

एतेक खर्चा अपना जेबी

आ कि सरकारी खजाना सँ

हमरा ध लेलक बेहोशी।



होश मे आउ गठबंधन बचाउ

हम सत्ता मे छी की कहू

अपनो खर्चा सरकारी भेल बड्ड बेसी

ई छी डिनर डिप्लोमेसी।।



कवि:- किशन कारीगर

आकाशवाणी दिल्ली।

दिसंबर 10, 2012


मिथिला  राज्य  के  धारण  में
देखल जाओ  एक  नजर
धनकर ठाकुर , कमला कान्त झा जी , विजय ठाकूर  , भीम  सिंह ,  शैलेंदर  झा  जी , इतियादी  महानु - भाव  के  उपस्थिथि  में  ,  सम्पन्य  भेल













मिथिलांचल टुडे  अध्यन  करैत   मैथिल समुदाय 











विजय ठाकुर  जी 


कमला कान्त  झा 








डॉक्टर  - गुरमैता  जी 








एक  दोसर  सन  भेट - घांट  करैत  फेस बूकिया  संघ  , जय  मैथिल - जय  मिथिला  करैत 

मिथिला राज्य के धारना  में फेस बूकिया  युबा संघ  बसन्त  झा  बत्स ,सागर मिश्र , विकास ठाकुर  , मदन कुमार ठाकुर , क्रिशन कुमार राय  (संपादक  मिथिलांचल टुडे ) जगदानन्द झा (मन्नू ) राजकुमार यादव , नीतिस  चौधरी , सत्येंदर कुमार  झा , इतियादी --

मिथिलांचल  टुडे  टीम 

 मिथिला राज्य के  धारना  में -मिथिलांचल टुडे  टीम 

मिथिला राज्य के  धारना में  मिथिलांचल  टुडे  टीम 

मिथिला राज्य के  धारना  में  मिथिलांचल टुडे  टीम 

धनाकर  ठाकू  जी   अपन  मुखरविन्द  सन  मैथिलि  आन्दोलन  के  बारे  में  चर्चा  करैत 


नवंबर 18, 2012

घोटालाबला पाइ (हास्य कविता)


घोटालाला पा
                         (हास्य कविता)


ई पोटरी त हमरा सँ 
उठने नहि उठि रहल अछि 
कनेक अहूँ जोड़ लगा दिय भाई 
ई छी घोटालावला पाई।

हम पूछलियन ई की छी 
ओ हमरा कान में कहलनि
कोयला बेचलाहा सभटा रुपैया 
हम एही पुत्री में रखने छि .

हमरा सात पुस्त लोकक गुजर
एही रुप्पैया स चली जायत
हम धरती में पैर नहीं रोपाब आई 
इ छि घोटालावला पाई।

चुपेचाप थोड़ेक अहूँ लिय 
मुदा केकरो सँ कहबई नहि भाई 
सरकारी संपित हम केलियई राई-छाई 
इ छि घोटालावला पाई।

कोयला भूखंडक बाँट-बखरा दुआरे
मंत्रिमंडल के सर्जरी भेल 
लोक हो-हल्ला केलक मुदा 
कोयला दलाली के नफ्फा हमरे ता भेल।

फेर मंत्री पद भेटैत की नहि?
ताहि दुआरे चुपेचाप पोटरी बनेलौहं 
सभटा अपने नाम केने छि भाई 
ई छी घोटालावला पाई।

देखावटी दुआरे सरकारी खजाना  पर 
बड़का-बड़का ताला लटकने छि 
मुदा राति होएते देरी हमीह 
भेष बदली खजाना लूटि लैत छी।

मंत्रीजी के कहल के नहि मानत?
सरकारी मामला में कियक किछु बाजत?
चुपेचाप सभटा काज होयत छैक औ भाई 
 ई छी घोटालावला पाई।

अक्टूबर 16, 2012

लोक करे लूटमार जेंका (हास्य कविता)

लोक करे लूटमार जेंका
                         (
हास्य कविता)

लोभी बैसल अछि लोभ मे जोंक जेंका
ओक्कर चालि चलब झपटमार जेंका
सरकारी खरांत लेल बेहाल भेल
लोक करे लूटमार जेंका.

लोभी लोकक भीड़ मे केकरा समझाएब
"
कारीगर" बैसल अछि चुपचाप बौक जेंका
बेईमान लोक नहि ईमानदारी सीखत?
लोक करे लूटमार जेंका.

डेग-डेग पर भ्रष्टाचारी भेटत 
ओ जाल बिछौने  बैसल अछि
चालि चलब प्रोपर्टी दलाल जेंका
लोक करे लूटमार जेंका.

सरकारी व्यबस्थाक हाल बेहाल
भ्रष्टाचारक बढ़ी गेल अछि मकड़जाल
एही ओझरी मे ओझराएल कतेक लोक
मुदा नेता नाचै अपने ताल.

जनताक नाम पर फुसियाहिंक जनसेवा
नेतागिरी के धंधा चमकि गेल
सभ खाए रहल सरकारी मेवा
जहिना बाढ़ी मे अपटल माछ कतेक रेवा.

बेमतलब के करै विदेश यात्रा
विकसित योजनाक नाम पर
बेहिंसाब खर्च करै जेना
सरकारी धन छैक ओक्कर बपौती जेंका.

बाढ़ी-सुखार सँ लोक तबाह भेल
मुदा कोनो स्थाई समाधान नहि कराउत
हवाई सर्वेक्षण मे नेता जी
फुसियांहिक बिधि टा पुराउत.

राहत आ बचाव के नाम पर
रहत पैकेजक बंदरबांट भ रहल
उज्जर कुरतावला सभ सँ आगू
ओक्कर चालि चलब झपटमार जेंका.