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मार्च 20, 2011

मोछ वाली माउगी।



 मोछ वाली माउगी।
                होली पर हास्य कथा।


धनिक दोकान दिस सॅ अबैत रही कि रस्ते मे खरंजे पर बिकाउ दास भेंट भए गेलाह पूछलनि बच्चा कहू करिया के कतहू देखलियैअ। हम बजलहूॅ नहि यौ बाबा हम अहॉ पोता के एमहर कहॉ देखलहूॅ। बिकाउ दास बजलाह धू जी महराज हम कारी सॅ केस दारही कटाएब अहॉ हमरा पोताक भांज कहि रहल छी। लगैए जे आई होरी खेलेबाक निशा मे अहॅू मातले छी। हमरे खनदानी नौआ छल कारी ठााकुर एमहर बिकाउ दासक पोताक नाम सेहो कारी। दूनू गोटे नामक अनुरूप देखैयोअ में ततबेक कारी। कारी जतबाक देखबा में कारी ओतबाक उजर धब- धब आकेर मोछ बड्ड ईमानदारी सॅ शाही अंदाज मे हजामत करैत छल। ओकरा मोछक आगू मे राजा महराजक मोछ छुछूआन लगैए। बिकाउ दास के हम कहलियैन बाबा बुझहैए मे धोखा भए गेल कारी नौआ तए अपने बथान दिस भेटत ओम्हरे जाउ ने। ताबैत उतरभारी दिस सॅ कारी अपने मगन में झूमैत चलि अबैत रहैए। ओनाहियो फागुन मे सभ अपना धुन में मगन रहैए। कारी के देखैत मातर बिकाउ दास बजलाह अईं रौ करिया एहि बेर जोगिरा गबै लेल नहि एबहि रौ तोहर सिद्धप वाली भाउज खोज पूछारी रहल छलखुन जे एहि बेर किर्तन मंडली होरी गीत गाबि जोगीरा खेलेताह कि नहि। कारी मोछ पिजबैत बाजल भैया अहॉ जाउ ने अहॉ भाउजी के कहबैन भांगक सरबत बना के रखतीह। हम सभ पहिने भगवति स्थान में होरी गीत गाबि अबीर चढ़ाएब तकरा बाद अंगने अंगने होरी खेलाएब।
           कारी के गप सुनि हमहूॅ राग मल्हार मे मोने मोन नाचए लगलहूॅ जे आई भंाग पीबि कारी संगे खूम नाचब। एहि बिचार मे मगन रही की कारी बाजल जे बच्चा अहॅू चलि आएब एहि बेर झाइल बजौनिहार लोक कम छै अहॉ गीत गाबि झाइलो बजाएब। गाम घर मे नाटक खेलाई हमही गीत नाद गाबै सॅ के मंच संचालन तक करी। तहि द्वारे निधोखे हम बजलहॅू बेस जाउ हम भगवती स्ािान में भेंटइ भए जाएब दूपहर दू बजे किर्तन मंडलीक सभ कलाकार आस्ते आस्ते जुटान होमए लगलयै। कारी अपना दरवज्जा पर बैसी के चिलम फूकै मे मगन रहैए एक सोंठ खिचनहियै रहै की केम्हरो सॅ मनोज क्रांतिकारी धरफराएल आएल कारी के देह पर धाई दिस खसल। बाजल हौ कारी कक्का आई तोरे संगे होरी खेलाएब। एतबाक मे कारी फनकैत बाजल कह हनो खसान खसब होइत छैक एखने चिलमक आगि सॅ मोछ झरैक जाएत। फेर मनोज बाजल हौ कक्का हमरो बेसी डंफाक ओजन छै तही दुआरे धरफरा गेलहूॅ। तकरा बाद  दूनू गोटे एक एक सोंठ चिलम खिचलक धुऑं नाक दए के फेकलकै की कारी बाजल रौ भातिज किर्तन मंडलीक कलाकार सभ कतए नुकाएल अछि।
      एतबाक में हरेकृष्ण ढ़ोलकिया ढ़ोल ढ़ूम-ढ़ूमबैत बुद्धना हरमोनियम पिपयबैत रामअशीष झाइलि झनकबैत तीनू गोटे तीन दिसि सॅं एकसुरे बजबैत आएल। ताबैत मे मनोज डंफा डूग-डूगबैत बाजल हल्ला गुल्ला बंद करू सुनु कारी कक्का के वाणी जी नहि भरू ढ़ोलकिया के पानि जी। कि एतबाक मे कारी कठझाइल झनकबैत बाजल जोगी जा सारा...रा...रा. सभ गोटे एक सुरे बाजल सारा रा रा। बुद्धन बाजल रौ मनोजबा तेहेन शास्त्रीय राग मे पानि भरबाक लेल कहलीह जे दू-चारि टा छौंड़ा मारेर डरे भागी गेल। मनोज बाजल हौ भौया रंग घोरबाक लेल पानि चाहि ने। रामअशीष बाजल हं रौ भजार ठीके कहलीहि आब कह जे एहि बेर भाउजी के बनत। एतबाक में कारी मोछ पिजबैत बाजल रौ भातिज जूनि चिंता कर हम एखन जीवते छी।
होरी मे कारी सौंसे गौआक भाउजी बनैत छलैक की बुढ़-पुरान की छौंड़ा मारेर सभ गोटे हंसी खुशी सॅ गीत गाबि कारी संगे दिअर भाउज जेका होरी खेलाइत छल। मनोज बाजल हौ कक्का माउगी बनबहक से साड़ी बेलाउज कहॉ छह। कारी बाजल धूर रे बुरिबक जो ने तू अपने माए बला साड़ि नेने ने तोरे माए हमरा भाउजे हेतीह। हौ कक्का तूं मारि टा खूएबह तोरा बुझलेह छह हमर बाप मलेटी सॅ रिटायर हमर माए सेहो मलेटी। सारी मे लाल पीअर लागल देेखतैह कतेक मुक्का मारत से कोनो ठीक नहि। अच्छा कक्का तू चिंता नहि करअ हम अपने कनियॉ वला नुऑ नेने अबैत छी। कारी बाजल रौ भातिज तू बुरहारी मे हमरा गंजन टा करेमेह। हम ससुर भए के पूतहॅू देहक नुऑ कोना पहिरब रौ राम-राम। लोक साड़ी देखैते मातर चिन्हि जेतैए जे तोरे कनियॉक नुआ छै तब लोको कोनो दसा बॉकि नहि राखत। बुद्धन कनेक बुझनुक बाजल हौ तोरा डर किएक होइत छह कियो पूछतह कहिअक जे बुधनाक साउस के नुआं छियैक। हमर साउस एखन अपने गाम आएल छथहिन। कारि सुनि चौअनियॉ मुस्कान दैति एकसुरे दू गिलास देसी भांगक सरबत घोंटि गेल बाजल बुधन तूं हरमोनिया बजाअ ताबैत हम समधिन संगे होरी खेलेने अबैत छी जोगी जा सारा...रा....रा। कि फेर सभ एकसुरे गाबैए लागल जोगी जा सारा रा रा। हरेकृष्ण ढ़ोलकिया ढ़ोल धूम-धूमबैत बाजल होरी मे कक्का करै छथि बरजोरी बुरहोरी मे मोन होइत छनि थोरू थोरू जोगी जा सारा रा रा। मनोज डंफा डूग-डूगबैत बाजल हौ कारी कक्का एना किएक मोन लुपलुपाइत छह। कारी झाइलि झनकबैत बाजल रौ भातिज फगुआ होइते अछि रंगीन तोंही कह ने मलपुआ खेबाक लेल केकर मोने ने लुपलुपाइत छैक। हं हौ कक्का एनाहियो होरी मे नएका नएका भाउज सबहक गाल मलपुए सन पुल पुल करैत रहैत छैक।
कारी साड़ी पहिर अनमन माउगी बनि गेल मुदा मोछक देखार चिनहार दुआरे घोघ तनने। कारी हाथ सॅ झाइलि हम गीत गाबि झाइलि बजबैत होरी गाबै लगलहूॅ रंग घोरू ने कनहैया हो खेलैए होरी रंग घोरू सभ गोटे गीत गबैत भगवति स्थान बिदा भेलहूॅ। भगवति के अबीर चढ़ा प्रणाम करैत मंडलीक सभ कलाकार अंगने अंगने होरी खेलेबाक लेल बिदा भेलहूॅ। जेहेन घर तेहेन सरबत कतहॅ छूछे रंग टा। मुदा लोक हॅसी खुशी होरी खेलाई मे मगन होइत होइत बिकाउ दासक दरवज्जा पर पहुॅचलहॅू होरी गीत शुरू केलहॅू हो हो किनका के हाथ कनक पिचकारी बुधना हरमोनियम पिपयबैत बाजल हो बिकाउ कक्का के हाथ कनक पिचकारी। एतबाक सुनितेह विकाउ दास अपना बेटा के हाक देलखिहिन हौ मांगनि जल्दी सॅ मंडली सभहक लेल दूध भांगक सरबत नेने आबह। सुनि हम सभ आर बेसी जोर सॅ जोगीरा गबै लगलहूॅं ताबैत मनोज एक आध बेर डंफा लेने धरफड़ा के खसि पड़ल। ओकरा उठेलहूॅ सभ गोटे भरि छाक भांगक सरबत पीबि होरी गबै मे मगन। एम्हर जोगीरा देखबाक लेल कनिया-पूतरा धिया-पूता  सभ घूघरू लागल। 
                एतबाक मे सिद्धप वाली दाई अबीर उड़बैत एलीह हॅसैत बजलीह गे दाए गे दाए नचनिहार माउगी के छीयैक? सुखेत वाली कनिया बजलीह माए इहेए चिन्थुहुन ने। दाई बजलीह चिन्हबै की पहिने रंग अबीर देह मुॅह छछारि दैति छियैक। दाई निधोखे रंग लगबै लगलीह की घिचा तिरी मे कारीक घोघ उघार भए गेलै। दाई बजलीह गे माए गे माए एहेन मोछ वाली कनियॉ पहिनुक बेर देखलहूॅ। ताबैत कारी मुस्की मारैत बाजल भाउजी हम छी अहॉक दुलरूआ दिअर कारी। दाई एतबाक सुनि ठहक्का मारैत बजलीह अईं रौ मोछ वाली कनियॉ ला कनि तोहर मोछो कारीये रंग मे रंगि दैति छियौ। एकटा दिअर भाउज के निश्छल प्रेम गामे घर में भेटत। तखने मनोज बाजल काकी कनियॉ पसीन भेल किने ? दाई बजलीह हं रौ मनोज बड्ड पसीन भेल 60 वर्षक अवस्था में पहिनुक बेर देखलहॅू एहेन सुनर मोछ वाली माउगी।            

लेखकhttp://kishankarigar.blogspot.in:- किशन कारीगर 





           
         


                  


मार्च 07, 2011

हमर फोटो कहियाअ ?


    हमर फोटो कहियाअ \
              
                   कन्या भ्रूणहत्या पर एकटा कथा।


कुसुम दाई भिंसरे सॅं हिंचैक-हिंचैक के कानि रहल छलीह किएक ने जानि से हमरो नहि बूझना गेल। ऑखि सॅं टप-टप नोर झहैर रहल छलैक कनैत-कनैत केखनो के हमरो दिस तकैत मुदा एक्को बेर चुप हेबाक नाम नहि। हम कॉलेज सॅ पढ़ा केॅं विद्यार्थी सभ के जल्दीए छुटटी दए के किछू काज सॅं आएल रही। जहॉ अंगना अएलहूॅं की केकरो कनबाक अवाज़ सुनलहॅू लग मे गएलहूॅ त देखलीयै जे कुसुम दाई कानि रहल छेलीह। हम लग मे जाके कुसुम के कोरा लेबाक प्रयास कएलहॅू मुदा ओ रूसि केॅं बाजल जाउ पप्पा हम अहॉ सॅ नहि बाजब। एतबाक बाजि ओ रूसि के बरंडा पर सॅ घर चलि गेल। हम दुलार कए के बजलहूॅ कुसुम अहॉ के की भेल हमर सुग्गा ने अहॉ बाजू ने। एतबाक सुनि ओ ऑखिक नोर पोछैत बाजल बाबू अहॅू बेईमान भए गेलहूॅ त आब हम केकरा सॅ अप्पन दुखःक गप कहियौअ अहि निसाफ कहू ने हमर फोटो कहियाअ \
            ई गप सुनि हम कनेक अचंभित भए गेलहॅू हम फेर सॅं पुछलहूॅ कुसुम अहॉ किएक कानि रहल छलहॅू की भेल से कहू ने। त ओ बाजल बाबू अहॉ त माए के बुझहा सकैत छियैक हमर फोटो लगेबा मे कोन हर्ज हमहूॅ त मनुक्खे छी ने फेर हमरा सॅ बेइमानी किएक? अहिं कहू जे हमर फोटो कहियाअ? एतबाक मे हमर कनियॉ चाह बनौने अएलीह कि ताबैत कुसुम दाई धिया-पूता सभ संगे खेलाई धूपाई लेल चलि गेल। हम एक घोंट चाह पीबि के अपना कनियॉ सॅं पुछलहॅू कुसुम किएक कानि रहल छलैक। हमर कनियॉ मुहॅ पट-पटबैत बजलीह मारे मुहॅ धए के अहिं त ओकरा दुलारू सॅ बिगाड़ि देने छियैअ त अहिं बुझियौअ। हमरा त एखने सॅ निलेशक चिंता लागल अछि केहेन होएत केहेन नहि। हम बजलहॅू बेटाक चिंता त अछि अहॉ के मुदा ई बेटीयो त हमरे अहिंक छी एक्कर चिंता के करतै एसगर हमही की अहॅू? एतबाक सुनि हमर कनियॉ मुहॅं चमकबैत रसोइघर दिस चलि गेलिह।
भिंसर भेलैक मुदा राति भरि हम ऑखि नहि मूनलहॅू एक्को रति नीन नहि आएल। भरि राति सोचैत विचारैत रहि गेलहॅू मुदा कुसुम के प्रशनक कोनो जवाब नहि सूझल। भिंसर ठीक सात बजे कुसुम दाई स्कूल जाइ लेल स्कूल बैग लए बिदा भेल त हमरा रहल नहि गेल। हम बजलहॅू कुसुम आई अहॉ स्कूल नहीं जाउ हमहॅू आइ कॉलेज सॅ छुटटी लए लेने छी तहि ,द्वारे दूनू बाप-बेटी भरि मोन गप-शप क लैत छी।एतबाक सुनि कुसुम फुदकैत हॅसैत हमरा लग मे आबि गेल कि हम ओकरा कोरा मे लए के झुला झुलाबए लगलहॅू। कुसुम बाजल पप्पा आई अहॉ पढ़बै लेल कॉलेज किएक नहि गेलहॅू अहॉ कथिक चिंता मे परि गेलहॅू से कहू।
               हम बजलहॅू  चिंता एतबाक जे अहॉक फोटो कहियाअ? मुदा अहॉ हमरा फरिछा के कहब तखने हम बूझहब हमरा अहॉक प्रशनक कोनो जवाब नहि भेट रहल अछि त अहिं साफ साफ कहू। एतबाक सुनि कुसुम दाई बाजल अहिं कहू त पप्पा अहॉ पी.एच.डी माए हमर एम.बी.ए मुदा देबाल पर हमर फोटो नहि। एहि ,द्वारे त हम समाजक सभ लोक सॅ पूछि रहल छी जे हमर फोटो कहियाअ? समाजक सोच कहियाअ बदलत। एक त कोइखे मे हमरा मारि देल जाइत अछि। जॅं बॅचियोअ जाइत छी त हमरा दाए-माए सभक मुहॅ मलीन भए जाइत छन्हि। ओ पहिने सॅ पोता बेटा हेबाक स्वपन देखैत छथहिन मुदा बेटी हेबाक सपना कियो ने देखैत अछि।
देखैत छियैक गर्भवति माउगी सभ दू-चारि मास पहिने सॅ देवाल पर बेटाक फोटो लगेने रहैत छैक। अड़ोसी पड़ोसी बजैत छथहिन हे महादेव एहि कनियॉ के बेटा देबैए फलां दाए के पोता देबैए। बेटा हाइए ,द्वारे कौबला पाति सॅ लए के अल्टॉसाउण्ड तक ई पूरा समाज बेटीक दुश्मन अछि। हमर माए त एकटा बेटीए छथहिन मुदा कहियोअ सेहन्तो देवाल पर हमर फोटो नहि लगेलखिन। त हम कोन खराब गप पुछलहूॅ जे हमर फोटो कहियाअ। कोन दिन समाजक सोच बदलत कहियाअ माए बहिन सभ देवाल पर बेटीक फोटो लगेतीह? कहियाअ बेटीक जनम भेला पर ढ़ोल पिपही बजा खुशी मनाउल जाएत मधुर बॉटल जाएत? देखैत छियैक बेटाक जनम भेला पर जिलेबी बुनियॉ मुदा बेटीक जनम भेला पर गुड़-चाउर बॉटल जाइत अछि।ई हमरा सॅ बेईमानी नहि त आर की थीक? पप्पा आई हम समाजक सभ लोक सॅ पूछि रहल छी हमर निसाफ कहियाअ?
   एखन हम कॉचे-कुमार छी मुदा जेना एखने सॅ हमरा बुझना जा रहल अछि जे हमर कुसुम दाई दुःखित भेल हमरा सॅ हमरा समाजक सभ पुरूख-माउगी सॅ पूछि रहल अछि बाबू अहिं निसाफ कहू हमर फोटो कहियाअ \\

     लेखक:- किशन कारीग़र
                                   
परिचय:- जन्म- 19830(कलकता में) मूल नाम-कृष्ण कुमार रायकिशन। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दू माताक नाम-श्रीमती अनुपमा देबी।मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी, जिला-मधुबनी (बिहार)। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम. फिल(पत्रकारिता) एवं बी. एड कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।


                 

फ़रवरी 18, 2011

लिखैत रही।


             लिखैत रही।

मोन होइए जे एक मिसिया कऽ पिबैत रही
मुदा कहियो कऽ किछू-किछू लिखैत रही
कनेक हमरो गप पर धियान देबैए
मोन होइए जे पाठक सभ सॅं भेंट करैत रही।

ग़ालिब सेहो एक मिसिया कऽ पिबैत छलाह
मुदा किछू-किछू तऽ लिखैत छलाह
अपना लेल नहि  पाठक लोकनिक लेल
मुदा बड्ड निक लिखैत छलाह।

पद्य लिखनाई तऽ आब हम सीख रहल छी
हमरा तऽ नहि लिखबाक ढंग अछि
मुदा किछू निक पद्य लिखि नेनापन सॅं
एतबाक तऽ हमर सख अछि।

िक िलखू िकछू ने फुरा रहल अिछ
बढलैऍ मँहगाई तऽ अधपेटे भूखले रहैत छी
िकऍक ने रही जाऍ भूखल पेट मुदा
िकछू िलखबाक लेल मोन सुगबुगा रहल अछी।

पोथि लिखलनि महाकवि विद्यापति
लिखलनि पोथि बाबा नागार्जुन
किछू नव रचना जे नहि लिखब
तऽ कोना भेटत मैथिली साहित्यक सद्गुण।

लेखक समाजक सजग प्रहरी होइत छथि
अपना लेल तऽ नहि अनका लेल लिखैत छथि
कतेक लोक हुनका आर्थिक अवस्था पर हॅसैत अछि
मुदा तइयो ओ चुपेचाप लिखैत रहैत छथि।


कहू एहेन उराउल हॅसी पर कोनो लेखक
एक मिसिया कऽ पिबत कि नहि
अपन दुःखित भेल मोन के
कखनो के अपनेमने हॅंसाउत कि नहि

कतेक लोक गरियअबैत अछि
एक मिसिया पीब कऽ लिखब ई किएक सीखू
मुदा आई किशन मोनक गप कहि रहल अछि
पिबू आ कि नहि पीबू मुदा किछूएक तऽ लिखब सीखू।

आई हमरो मोन भए रहल अछि
जे एक मिसिया कऽ पिबैत रही
अपना लेल नहि तऽ पाठक लोकनिक लेल
मुदा किछू नव रचना लिखैत रही।


 लेखक:- किशन कारीग़र              
                                   


फ़रवरी 17, 2011

देशऽक चिन्ता - किशन कारीगर

  
      देशऽक चिन्ता

किनको छनि स्वार्थक चिन्ता
किनको छनि घूस लेबाक चिन्ता
नेता सभ के अछि कुर्सीक चिन्ता
मुदा किनको नहि अछि, देशऽक चिन्ता।

चुनाव जीतलाक बाद, कुर्सी भेटलैन्ह नेताजी के
भऽ गेलाह निःफिकीर
मुदा भाषणेटा मे खिचैत छथि
आर्थिक विकासऽक लकीर ।

भूखे मरैत अछि गरीब जनता
एहि बातक हुनका नहि छनि कोनो चिन्ता
शहीद होइत छथि देशऽक सीमा पर जुआन
कानब तऽ दूरक गप, श्रद्धांजलियो दैए लेल नहिं औता।

नेता सभ मंत्रालय लेल छथि परेशान
कियो स्वार्थसिद्धिक लेल अछि हरान
कियो भूखे मरि जाए, कियो दहा जाएय बाढ़ि मे
मुदा हुनका नहि, जेतैन मरल लोक पर धियान।

घूस खाईत-खाईत भऽ गेलाह भ्रष्ट
मुदा खादिक अंगा पहिर, अपना के बुझैेत छथि श्रेष्ट
कोना कऽ हेतै आर्थिक विकास
नहिं सोचैत छथि, नहि छनि चिन्ता।
सभ पार्टी के तऽ अछि कुर्सीक चिन्ता
मुदा किनको नहिं अछि देशऽक चिन्ता।

ई कविता विदेह में प्रकाशित भेल अछि।



 लेखक:- किशन कारीग़र
              
                                   
परिचय:-जन्म- 19830 कलकता में मूल नाम-कृष्ण कुमार राय "किशन"। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय "नन्दू" माताक नाम- श्रीमती अनुपमा देबी। मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी जिला-मधुबनी बिहार। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा, कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम फिल पत्रकारिता एवं बी एड कुरूक्षे़त्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।





मूरही-कचरी

   
                    
                       मूरही-कचरी
                             एकटा हास्य कथा।


दिल्ली संॅ दरभंगा होयत अपन गाम मंगरौना जायत रही। रस्ते में एकटा नियार केलहूॅं जे एहि बेर महादेव मंठ जेबेटा करब। एतबाक सोचैते-सोचैते कखन गाम पहुॅंच गेलहूॅं सेहो नहिं बूझना गेल। चारि बजे भोरे अंधराठाढ़ी यानी वाचसपतिनगर रेलवे स्टेशन उतरलहूॅं रिक्शावला सभ के हाक देलियै। भोला छह हौ भोला। ताबैत दोसर रिक्शावला बाजल जे आई भोला नहि एलै कियो बाजल जे जोगींदर आयल हेतै तकियौ ओकरा। भोला आ जोगींदर दूनू गोटे गामक रिक्शावला रहैए कोनो बेर गाम जाइ तऽ ओकरे रिक्शा पर बैसि क स्टेशन सॅं गाम जाइत छलहूॅं। एतबाक मे जोगींदर ओंघायत हरबराएल आएल अनहार सेहो रहै। वो बाजल कतए जेबै अहॉं। हम मंगरौना जाएब कक्का हमरा नहि चिन्हलहूॅं की। हॅं यौ बच्चा आवाज़ सॅं आब चिन्हलहूॅं आउ-आउ बैसू रिक्शा पर। दूनू गोटे गप सप करैत बिदा भेलहूॅं ताबैत जोगींदर सॅं हम पूछलियै कक्का ई कहू जे एहि बेर बाबाक दर्शन केलहूॅ किनहि। हॅं यौ बच्चा एहि बेर सजमैन खूम फरल छलै से हमहूॅं चारि बेर बाबा के जल चढ़ा एलहॅू आओर हुनका लेल सजमैन सेहो नेने गेल रहियैन। एतबाक में भगवति स्थान आबि गेल हम रिक्शा पर सॅं उतरि के भगवति केॅं प्रणाम करैत तकरा बाद अपना आंगन गेलहूॅ।
हमरा गामक प्रारंभ में भगवति स्थान अछि। गाम पर गेलहूॅं सभ सॅं दिन भरि भेंट घांट होयत रहल। भिंसर भेलै संयोग सॅं ओहि दिन रवि दिन सेहो रहै। बाबा सॅं भेंट करबाक मोन आओर बेसी आतुर भऽ गेल नियार केलहूॅं जे आई महादेव मंठ जाके बाबाक दर्शन कए आबि। हमरा गाम सॅ किछूएक दूर देवहार गाम में मुक्तेश्वर नाथ महादेवक प्राचीन मंदिर अछि जकरा लोक बोलचाल में महादेव मंठ कहैत छैक। ओना तऽ सभ दिन बाबाक पूजा होइत छलैक मूदा रवि दिन के भक्त लोकनीक बड् भीड़ होइत छलैक किएक तऽ ओहि दिन मेला सेहो लगैत छलै त दसो-दीस सॅ लोग अबैत छल।दरभंगा पढैत रही तऽ हमहूॅं महिना मे एक आध बेर महादेव के जल चढा पूजा कए अबैत छलहॅू। गामे पर भिंसरे नहा के बिदा भेलहूॅं माए हमर फूल बेल पात ओरियान कके देलिह। गाम पर सॅ मुक्तेश्वर स्थान बिदा भेलहॅू पैरे-पैरे जायत रही तऽ जहॉं गनौली गाछी टपलहॅू कि रस्ते में एकटा पिपरक गाछ छलै। ओतए सॅं महादेव मंदिर लगे में रहै। ओहि पिपर गाछ लक एकटा जटाधारी साधू भेटलाह हम कहलियैन बाबा यौ प्रणाम।
एतबाक में बाबा बजलाह जे कहबाक छह से जल्दी कहअ हमरा आई बड् जार भऽ रहल अछि। बाबाक ई गप सूनी कें हमरा कनेक हॅंसी लागि गेल। हम बजलहॅू आईं यौ बाबा अपने सन औधरदानी के कहॅू जार भेलैए। अपने तऽ एनाहियों सौंसे देह भभूत लेप के मगन रहैत छी। बाबा बजलाह हौ बच्चा आब लोक सभ ततेक जल चढ़बैत अछि जे हमरा कॅपकॅपि धअ लैति अछि। तूहिं कहए तऽ एहि उचित जे भक्त सभ हमर देह भिजा के निछोहे परा जाइत अछि। आब तऽ लोक सभ पूजा करै लेल नहि ओ त मूरही-कचरी खाई लेल अबैत अछि। हम बजलहूॅं बाबा अपने किएक खिसियाएल छी आई तऽ हम अहॅाक लेल दूध सेहो नेने आइल छी चलू-चलू मंदिर चलू भक्त लोकनि ओहि ठाम अहॉं के तकैत हेताह। बाबा खिसियाअत बजलाह कियो ने तकैत होयत हमरा तू देख लिहक सभ मूरही कचरी खाए में मगन होयत। तूॅं दरभंगा पढ़ैत छलह तऽ दूध सजमैन लए के अबैत छेलह मुदा जहिया सॅं पत्रकार भए दिल्ली चलि गेलह हमर कोनो खोजो पूछारी नहि केलह।
देखैत छहक मंगरौना चैतीक मेला मे तोहर गामवला सभ लाखक लाख टका खर्च करैत अछि मूदा हमरा लेल भागेश्वर पंडा दिया छूछे विभूत टा पठा दैति अछि। मंगरौनाक चैती मेला बड्ड नामी छलैक ओतए कलकता सॅं मूर्ती बनौनिहार आबि के भगवतिक मूर्ती बनबैत छलैक एहि द्वारे दसो दिस सॅं लोक मेला देखबाक लेल अबैत छलाह। भागेश्वर झा महादेव मंदिरक पंडा रहैत हुनके दिया बाबाक पूजा लेल सभ किछू पठा देल जायत छलैक।बाबा फेर खिसियाअत बजलाह जे आइ हम मंदिर नहि जाएब। हम कहलियैन जे बाबा अपने चलू ने मंदिर अहॉ जे कहबै आई से हेतै आबौ अहॉंक कॅंपकॅंपि दूर भेल किनहि \ नहि हौ बच्चा आई त हमरा बूझना जाए रहल अछि जा धरि मूरही-कचरी नहि खाएब ताबैत हमर ई जार-बोखार नहि छूटत। कहू त बाबा अपने एतबाक गप जे पहिने कहने रहितहॅू त हम एतबाक देरी] बच्चा कतेक दिन मोन भेल जे तोरा कहिअ जे हमरो लेल किछू गरमा-गरम नेने अबिह मुदा नहि कहलियअ ।हम मंदिर सॅं बाहर निकैल देखैत छलहूॅं जे लोग सभ हमरा जल ढ़ारी के निछोहे मूरही-कचरी वला लक परा जाइत छल एमहर हम एसगर थर-थर कॅपैत रहैत छलहूॅं कियो पूछनिहार नहि। आब लोग हमर पूजा सॅं बेसी अपन पेट पूजा में धियान लगबैत छथि। चलअ आब तहूॅं देखे लिहक जे हम सत्ते कहैत छियअ कि झूठ।
ओही पिपर गाछ लक सॅं हम आओर बाबा बिदा भेलहूॅं रस्ता में बाबा बजलाह जे हम किछू काल मंदिर मे रहब पूजा केलाक बाद हमरा बजा लिहअ। हम कहलियैन हे ठिक छै बाबा हम अपनेक लेल मूरही-कचरी किन लेब तकरा बाद अहॉ के बजाएब त चलि आएब। ओही ठाम सॅं बाबाक संग हम मंदिर पहुॅंचलहूॅं। ओतए देखलिए जे लोग सभ बाबा के जल चढ़ा निछोहे परा जाइत छल। ओना त मिथिलांचल मे मूरही-कचरीक सुंगध सॅं केकर मोन ने लुपलुपा जाएत अछि। हमहूॅं बाबाक पूजा पाठ केलाक बाद मेला घूमए गेलहॅू तऽ सभ सॅं पहिने पस्टनवला लक कचरी किनबाक लेल गेलहूॅं। ओकर कचरी एहि परोपट्ा मे नामी छल। हमरा देखैते मातर ओ अहलाद बस बाजल आउ-आउ किशन जी कहू कुशल समाचार। हम कहलियै जे बड्ड निक अपन सुनाबहअ। कचरीवला बाजल जे हमहूॅ ठिके छी दोकान अपना खर्चा जोकर चलि जाएत अछि। अच्छा आब हमरा दस रूपयाक मूरही-कचरी झिल्ली अल्लू चप दए दिहक। ओ हरबराइत बाजल हयिए लिए अखने गरमा-गरम  कचरी अल्लू चप सबटा निकालबे केलिए अहिमें सॅं दए दैत छी। हम कहलियै जे दए दहक गरमा गरम एहि मे सॅं।
 ओकरा हम पाइ दैत मंदिर दिस बिदा भेलहॅू ओतए पहुॅचतैह हम बाबा के हाक देलियैन मुदा कोनो जवाब नहि भेटल। हम एक बेर फेर हाक लगेलहॅू जे बाबा छी यौ कतए छी \ जल्दी चलि आउ कचरी सेराए रहल अछि। मुदा बाबाक कोनो प्रत्युतर नहि भेटल। हमरा बुझना गेल जे बाबा फेर खिसियाकेॅे कतहूॅ अलोपित भए गेलाह। दुःखित मोन सॅं हम गाम पर बिदा भेलहूॅं। पैरे-पैरे जाएत रही तऽ जहॉ पिपर गाछ लक एलहूॅं कि ओ जटाधारी साधू फेर भेटलाह। हमरा देखैते ओ बजलाह आबह-आबह तोरे बाट तकैत छलहूॅं जल्दी लाबअ मूरही-कचरी दूनू गोटे मिलि कए गरमा गरमा खाए लैत छी। तकरा बाद पोटरी खौलैत हम बजलहॅू हयिए लियअ बाबा खाएल जाउ। मुदा ई कि ओ फेर ऑखिक सोझहा सॅं कतहॅू अदृश्य भए गेलाह। बाबा सॅं भेंट तऽ भेल ओहि पिपर गाछ लक मुदा बाबाक लेल किनल मूरही-कचरी रखले रही गेल।


 लेखक:- किशन कारीग़र
              
                                   
परिचय:-जन्म- 19830 कलकता में मूल नाम-कृष्ण कुमार राय किशन। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दूमाताक नाम- श्रीमती अनुपमा देबी। मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी जिला-मधुबनी बिहार। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम फिल पत्रकारिता एवं बी एड कुरूक्षे़त्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।












फ़रवरी 14, 2011

किरीम लगाउ-मुहॅ चमकाउ



  किरीम लगाउ-मुहॅ चमकाउ

                 ।एकटा हास्य कथा।

बाबूबरही बज़ार सॅ घूमी क अबैत रही जहॉ सतघारा टपलहूॅ की मुक्तेश्वर स्थान लग बाबा भेंट भए गेलाह। हुनका देखैते मातर हम प्रणाम कहलियैन की बाबा बजलाह आबह बच्चा तोरे बाट ताकि रहल छलहूॅ जे कहिया भेंट हेबअ कतेक दिन बाद एमहर माथे एलह कहअ केमहर सॅ ख़बर नेने आबि रहल छह। हम बजलहूॅ बाबा हम त बरही हाट सॅ तीमन तरकारी किनने आबि रहल छी।
                 बाबा हरबड़ाईत बजलाह हौ बच्चा हमरो एगो मुहॅ चमकौआ किरीम देए ने ।हम पुछलियैन बाबा ई कहू जे मुहॅ चमकौआ किरीम केहेन होइत छैक। बाबा खिसियाअैत बजलाह कह त तोंही मीडियावला सभ प्राइम टाइम मे हल्ला कए लोक के कहैत छहक जे मरद भए के माउगीवला किरीम यदि हमरा जॅका गोर बनना है त ईमामी हैण्डसम मरदवला किरीम सिरीफ साते दिन मे दोगुना गोरापन। अहि दुआरे भेल जे हमहॅू कनि गोर-नार भए जाइत छी। हम बजलहूॅ बाबा अहॉ कथि लेल एहि किरीम सबहक फेरा मे परैत छी अहॉ त केहेन बढ़ियॉ सौंसे देह बिभूत लेप के अपने मगन मे रहैत छी। हमहूॅ तए अहिं जॅका साधुए छी हमरा लग मुहॅचमकौआ किरीम नहि अछि। ई सुनि बाबा तामसे अघोर भेल बजलाह तहॅू फूसि बजैत छह देखेत छहक मीडियावला लक तए रंग बिरंगक किरीम रहैत छैक तहूॅ मंगनी मे मदैद नहि करबह त हयिए ले 5रूपया आ लाबह मुहॅचमकौआ किरीम।
हम असमंजस मे परि गेलहॅू जे बाबा सन औधरदानी लोक के किरीमक कोन काज से कनेक फरिछा के पूछि लैति छियैन जे की भेल। हम पुछलियैन त बाबा बजलाह हौ बच्चा तोरा सभटा गप की कहियअ। बड्ड सख सॅ चारि बरिख बाद बसहा पर बैसि हम अपन सासुर हरीपुर गेल रही। गौरी दाए त बियाहे दिन सॅ हमर ठोर मुहॅं देखि रूसल छलीह। हम सोचलहॅू जे आई हुनकर सखी सहेली माने हम अपन सारि सभ सॅ हॅसी मज़ाक कए मोन मे संतोख कए लैति छी। हम अपना सारि सॅ पूछलहू कहू कुशल समाचार कि हमर सारि उपकैरि के बजलीह बुरहबा बर बड्ड अनचिनहार बुरहारी मे लगलैन किरीमक बोखार आ सभ गोटे भभा भभा के खूम हॅसैए लगलीह। हम पूछलियैन जे साफ साफ कहू ने की कहि रहल छी कि हमर दोसर सारि आर जोर सॅ हॉ हॉ के हॅसैत बजलीह अईं यौ पाहुन बुरहारी मे सासुर अएलहॅू त अकील रस्ते मे हेरा गेल की\ हम बजलहू से की त एतबाक मे हमर छोटकी सारि मुहॅ चमकबैत बजलीह देखैत छियैक हाट बज़ार मे रंग बिरंगक किरीम पाउण्डस बोरो प्लस डोभ एसनो पाउडर फेरेन लबली बिकायत छै से सब लगा के मुहॅ उजर धब धब बना लेब से नहि। एहेन कारि झोरी मुहॅ पर त घसबैहनियो ने पूछत आ हम तए एम.बी.ए केने छी। जाउ थुथून चमकौने आउ तब हॅसी मज़ाक करब।
    आब तोंही कहअ जे बिना किरीम लगौनेह जान बॉचत। देखैत छहक नएका नएका छौंड़ा सभ सासुर जाइअ सॅ पहिने ब्यूटी पार्लर जा थूथून चमकबैत अछि। हौ बच्चा कि कहियअ एखुनका छौंड़ीयो सभ कम ने अछि देखैत छहक किरीम  लगबैत लगबैत मुहॅ मे फाउंसरी भए जाइत छैक मुदा थुथून चमकबै दुआरे इहो मंजूर। पछिला पूर्णिमा मेला देखबाक लेल छहरे-छहरे पिपराघाट मेला गेल रही त ओतए गौरी दाए के दू चारि टा बहिना सभ भेंट भए गेलीह हम पूछलियैन जे कहू मुहॅ मे एतेक फाउंसरी केना? कि ताबैत हमर साउस केमहरो सॅ बजलीह पाहुन हिनका सभटा गप कि कहियैन ई सभ किरीम लगेबाक फल। ई छाउंड़ी सभ फिलमी हिरोईन सॅ एक्को पाई कम नहि अछि बिना ब्यूटि पार्लर जेने एकरा सभ के अनो पानि नहि नीक लगैत छैक। ई सुनि हमरो भेल जे ब्यूटी पार्लर जा कनेक थुथून चमका लैति छी। मुदा हम जे ब्यूटि पार्लर जाएब से जेबी मे एक्कोटा पाइओ नहि अछि। भागेसर पंडा के कतेको दिन कहलियैअ जे हमरो ब्यूटि पार्लर नेने चलअ से ओकरो भरि भरि दिन फूंसियाहिक पूजा-पाठ सॅ छुट्टी ने।
  हम बजलहॅू त बाबा दिल्ली चलू ने ओतए त बड्ड नीक एक पर एक ब्यूटि पार्लर छै। बाबा बजलाह हौ बच्चा हम डिल्ली नहिं जाएब हौ कियो नमरो पता नहि बता दैत छैक एक सॅ एक ठग लोक सभ रस्ते पेरे भेटतह हमरा त डर होइए। त बाबा चलू ने फिलिम सिटी नोएडा ओहि ठाम फेसियल करा लेब। बाबा बजलाह नहि हौ बच्चा बुरहारी मे एहेन करम नहि करब जे कोनो न्यूज़ चैनल जाएब। तोरो मीडियावला के सेहो कोनो ठीक नहि छह बेमतलबो गप के ब्रेकींग न्यूज़ बना दैति छहक। हम एमहर ब्यूटि पार्लर आ कोन ठिक तों खटाक दिस चैनल पर चला देबहक ब्रेकींग न्यूज़ किरीम लगाउ-मुहॅ चमकाउ।


 लेखक:- किशन कारीग़र
              
                                   
परिचय:- जन्म- 19830(कलकता में) मूल नाम-कृष्ण कुमार रायकिशन। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दू माताक नाम-श्रीमती अनुपमा देबी।मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी, जिला-मधुबनी (बिहार)। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम. फिल(पत्रकारिता) एवं बी. एड कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।


फ़रवरी 12, 2011

गलचोटका बर - किशन कारीगर

             
          गलचोटका बर।

                    ¼एकटा हास्य कविता)

देखू-देखू हे दाए-माए
केहेन सुनर छथि गलचोटका बर।
तिलकक रूपैया छनि जे बॉंकि
सासुर मे खाए नहि रहल छथि एक्को कर।

अनेरे अपसियॉंत रहैत छथि
अल्लूक तरूआ छनि हुनका गारा में अटकल।
खाइत छथि एक सेर तीन पसेरी
मुदा देह सुखाएल छनि सनठी जॅंका छथि सटकल।

केने छथि पत्रकारिताक लिखाई-पढ़ाई
दहेजक मोह मे छथि भटकल।
ऑंखि पर लागल  छनि बड़का-बड़का चश्मा
मुहॅं कान निक तऽ चैन छनि आधा उरल।

ओ पढ़हल छथि तऽ खूम बड़ाई करू ने
मुदा हमरा पढ़नाईक कोनो मोजर ने।
बाबू जी के कतेक कहलियैन जे हमरो पसीन देखू
मुदा डॉक्टर इंजीनियर जमाए करबाक मोह हुनका छूटल ने।

जेना डॉक्टर इंजीनियरे टा मनुख होइत छथि
लेखक समाजसेवीक एको पाई मोजर ने।
सोच-सोच के फर्क अछि मुदा केकरा समझाउ
दूल्हाक बज़ार अछि सजल खूम रूपैया लूटाउ ने।




एहि बज़ार में अपसियंॉत छथि लड़की के बाप
इंजीनियर जमाए कए छोड़ैत छथि अपन सामाजिक छाप।
एहि लेल तऽ अपसियॉंत छथि एतबाक तऽ ओ करताह
बेटीक निक जिनगी लेल ओ किछू नहि सोचताह।

अहॉं बेटी केॅ निक जॅंका राखब दहेज लैत काल
हमरा बाबू के ओ तऽ बड़का सपना देखौलनि।
ई तऽ बाद मे बूझना गेल जे किछूएक दिनक बाद
दहेजक रूपैया सॅं ओ पानक दोकान खोललैनि।

नहि यौ बाबू हम नहि पसिन करब एहेन सुनर बर
एतबाक सोचिए के हमरा लगैत अछि डर।
भले रहि जाएब हम कुमारी मुदा
कहियो ने पसिन करब, एहेन दहेज लोभी गलचोटका बर।

 लेखक:- किशन कारीग़र
              
                                   
परिचय:- जन्म- 19830(कलकता में) मूल नाम-कृष्ण कुमार रायकिशन। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय नन्दू माताक नाम-श्रीमती अनुपमा देबी।मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी, जिला-मधुबनी (बिहार)। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम. फिल(पत्रकारिता) एवं बी. एड कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।